Monday, July 15, 2024
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नींद के लिए आदर्श समय क्या होना चाहिए? कम या ज्यादा सोने के नुकसान

हेल्थ डेस्क। जब बात नींद के लिए आदर्श समय पर होती है तो सामान्य तौर पर हमें कई बार बताया जाता है कि रात में 7-8 घंटे की नींद हर व्यक्ति के लिए जरूरी है। अच्छी नींद से शरीर को आराम मिलता है, और हम पूरा दिन फ्रेश और एनर्जेटिक महसूस करते हैं। जबकि आधी अधूरी नींद दुर्बलता, कमजोरी और सुस्ती का कारण बनती है। लेकिन सच तो ये है कि सोने का कोई आदर्श समय नहीं होता।

कुछ लोगों को 8 घंटे से कम तो कुछ को 8 घंटे से अधिक सोने की जरूरत पड़ सकती है। सोने की अवधि कुछ हद तक व्यक्ति के जीन्स और उम्र पर निर्भर करती है, नींद के लिए आदर्श समय क्या होना चाहिए? ये जानना जरूरी हो जाता है।

तो आइये इसी सवाल का जवाब जानने की कोशिश करते हैं-

कैसे पहचाने आपकी नींद के लिए आदर्श समय क्या होगा?

हम सभी हमारी दैनिक दिनचर्या, व्यायाम, स्वास्थ्य और काम करने का तरीका आदि तौर पर एक दूसरे से बहुत अलग है। इसलिए यह निर्धारित करने का कोई आदर्श तरीका नहीं होगा कि आपको कितने घंटे नींद की लेना चाहिए। जब आप जागते हैं, तो आप कैसा महसूस करते हैं, यह नींद के लिए आदर्श समय पता करने का सबसे अच्छा मानक हो सकता है। इससे आप आसानी से जान सकते हैं कि वाकई आपके लिए कितने घंटों की नींद पर्याप्त है। यदि आप 6 घंटे सोने के बाद उठाने पर ऊर्जावान व बेहतर महसूस करते है तो यह आपके के लिए उचित नींद हो सकती है। अगर सोने के बाद भी थकान महसूस होती है तो आपको सोने का समय बढ़ाने की जरूरत है। अपनी आदर्श नींद को पहचानने का यही एक बेहतर तरीका हो सकता है।

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जरूरत से ज्यादा सोने के नुकसान

ज्यादा देर तक सोने से आपको मोटापे से लेकर शुगर जैसी बड़ी परेशानियां घेर सकती हैं। तो आइए जानते हैं ज्यादा देर तक सोने से क्या बड़े नुकसान हो सकते हैं-

डायबिटीज- जैसा महसूस किया जा सकता है कि ज्यादा देर तक सोने से व्यक्ति की फिजिकल एक्टिविटी बहुत कम हो जाती है जिससे शुगर लेवल बढ़ने का खतरा रहता है।

दिल के रोग- एक्सपर्ट्स की माने तो अधिक नींद लेने से दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

डिप्रेशन का खतरा- जरूरत से ज्यादा सोना भी डिप्रेशन का कारण बन सकता है। इतना ही नहीं अधिक देर तक सोने से व्यक्ति के भीतर सुस्ती बनी रहती है और उसका मन रोजाना के काम में भी नहीं लगता है।

पीठ में दर्द- कुर्सी पर बैठकर घंटों काम करने वाले लोग अगर अधिक देर तक सोते हैं तो उन्हें पीठ दर्द , गर्दन, कंधों में दर्द की समस्या का खतरा रहता है।

मोटापा- ज्यादा देर सोने से फिजिकल एक्टिविटी कम हो जाती है, जो आगे चलकर वजन और मोटापा बढ़ने का कारण भी बन सकता है। इतना ही नहीं इसकी वजह से पाचन क्रिया भी प्रभावित होती है।

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जरूरत से कम सोने के नुकसान

हमारे संपूर्ण शारीरिक गतिविधियां सुचारु रूप से नियंत्रित रखने के लिए नींद बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अच्छी नींद क्षतिग्रस्त रक्त-वाहिनियों, मांसपेशियों और ऊतकों की मरम्मत करने में मदद करती है। लगातार नींद का अभाव है हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, गुर्दों के विकारों, स्ट्रोक, और मधुमेह से संबंधित बीमारियों को बढ़ाता दे सकता है। अच्छी नींद एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली का निर्माण करने में भी मदद करती है, जो आपके शरीर को वायरल और बैक्टीरियल संक्रमणों से बचाव में मदद करती है।

कार्य करने की क्षमता में कमी- नींद की कमी आपको लो-प्रोडक्टिव बना सकती है। जब आप नींद काम लेते हैं तो काम पर आपकी एकाग्रता कम हो जाती है। जिससे कार्य पूरा करने में अधिक समय लगता है।

हार्मोनल बैलेंस बिगड़ता है- सोते समय हमारे शरीर में महत्वपूर्ण हार्मोन का निर्माण होता है जो हमारी भूख,और ऊर्जा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। अगर हमें पर्याप्त नींद नहीं मिलती है, तो हमारे शरीर का हार्मोनल संतुलन बिगड़ने का खतरा रहता है।

कोर्टिसोल स्तर व इंसुलिन को बढ़ावा- कम नींद हमारे कोर्टिसोल स्तर यानी तनाव हार्मोन और इंसुलिन को बढ़ाती देती है जिससे वजन बढ़ने के साथ मधुमेह का भी खतरा बढ़ जाता है। नींद का अभाव हमारे शरीर में लेप्टिन हार्मोन को भी कम करता है यह हार्मोन हमारे मस्तिष्क को खाने की पूर्ती का संकेत देता है। इसके अलावा घ्रालिन हार्मोन के स्तर को बढ़ाता है यह हार्मोन जो हमें भूख का एहसास कराता है। इसलिए यदि आपको उचित नींद नहीं मिल रही है, तो आप थका हुआ महसूस करेंगे जिसकी की वजह से एक्सरसाइज नहीं कर पाएँगे और अधिक भोजन आपके वज़न को बढ़ायेगा।

खराब नींद मस्तिष्क को रीचार्ज नहीं कर पाती- अच्छी नींद आपके मस्तिष्क में नए तंत्रिका पथ बनाकर आपको अगले दिन नई जानकारी सीखने, बनाए रखने और उपयोग करने में मदद करती है। अच्छी नींद एक तरह से आपको रिचार्ज करने का काम करती है जिससे आप अधिक स्पष्ट रूप से सोचने, समस्याओं को हल करने, रचनात्मकता, निर्णय और ध्यान केंद्रित करने में सक्षम होते है।

खराब नींद भावनात्मक स्वास्थ्य को बिगाड़ती है- नींद की कमी आपको चिड़चिड़ा, अक्रोशी बना देती है। इसके अलावा, कम नींद आत्महत्या की प्रवृत्ति, अवसाद, ध्यान की कमी जैसी कई समस्याएं पैदा कर सकती है।

(Disclaimer : इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं। राष्ट्र-बंधु इनकी पुष्टि नहीं करता है। इन पर अमल करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।)

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Arvind Maurya
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