Women’s Day Special: नारी मानव जाति की रचनाकार!

 Women’s Day Special: नारी मानव जाति की रचनाकार!

Women’s Day Special: नारी मानव जाति की रचनाकार!

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस – 8 मार्च पर विशेष लेख (Women’s Day Special)

-डॉ. जगदीश गाँधी, संस्थापक-प्रबन्धक, सिटी मोन्टेसरी स्कूल, लखनऊ

स्त्री के बिना परिवार, समाज और राष्ट्र का निर्माण संभव नहीं है

अपने जन्म के पहले से ही अपने अस्तित्व की लड़ाई को लड़ती हुई नारियां (Women) इस धरती पर जन्म लेने के बाद भी अपनी सारी जिंदगी संघर्षों एवं मुश्किलों से सामना करते हुए समाज में अपनी एक अलग पहचान बनाती जा रही हैं। लेकिन बड़े दुःख की बात है कि घर, परिवार की जिम्मेदारियों से लेकर अंतरिक्ष तक अपनी कामयाबी का झंडा फहराने वाली इन बेटियों को समाज में अभी भी भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। जबकि महर्षि दयानंद ने कहा था कि ‘‘जब तक देश में स्त्रियां सुरक्षित नहीं होगी और उन्हें, उनके गौरवपूर्ण स्थान पर प्रतिष्ठित नहीं किया जायेगा, तब तक समाज, परिवार और राष्ट्र का निर्माण संभव नहीं है।’’ वेदों में नारी को ब्रह्मा कहा गया है। वेद के अनुसार जिस प्रकार ¬प्रजापति संसार की रचना करते हैं, उसी प्रकार स्त्री मानव जाति की रचनाकार है।

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वही देश उन्नति कर सकते हैं, जहाँ स्त्रियों को उचित स्थान दिया जाता है

‘मनुस्मृति’ में लिखा है कि यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवतः। यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः।। (मनुस्मृति,3/56) अर्थात् ”जहाँ स्त्रियों का आदर किया जाता है, वहाँ देवता रमण करते हैं और जहाँ इनका अनादर होता है, वहाँ सब कार्य निष्फल होते हैं। वाल्मीकि जी ने ‘रामायण’ में कहा है ”जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” अर्थात् ”जननी और जन्म-भूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है।” स्वामी विवेकानन्द जी का कहना था कि वही देश उन्नति कर सकते हैं, जहाँ स्त्रियों को उचित स्थान दिया जाता है तथा उनकी शिक्षा का भी उचित प्रबंध किया जाता है। हमारी केंद्र और राज्य सरकारों ने देश के नव निर्माण एवं विकास में स्त्रियों की महत्ता को समझते हुए उनके सशक्तिकरण के लिए शिक्षा के साथ ही रोजगार से संबंधित कई योजनायें चला भी रखी हैं, जिनके द्वारा वे एक ओर जहाँ खुद भी सशक्त हो रही हैं तो वहीं दूसरी ओर अपने परिवार, समाज और राष्ट्र को भी सशक्त बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

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स्त्री शिक्षा के बिना न परिवार शिक्षित हो सकता है और ना ही समाज

संस्कृत में यह उक्ति प्रसिद्ध है- ‘नास्ति विद्यासमं चक्षुर्नास्ति मातृ समोगुरू’’ इसका मतलब यह है कि इस दुनिया में विद्या के समान नेत्र नहीं है और माता के समान गुरू नहीं है।’ यह बात पूरी तरह सच भी है क्योंकि किसी भी बालक पर सबसे पहले और सबसे अधिक प्रभाव उसकी माता का ही पड़ता है। इसलिए महिलाओं का शिक्षित होना आवश्यक ही नहीं बल्कि अनिवार्य भी है। विश्वविद्यालय आयोग (1948-49) ने स्त्री शिक्षा का महत्व इस प्रकार बताया है – स्त्री शिक्षा के बिना लोग शिक्षित नहीं हो सकते हैं। यदि शिक्षा को पुरूषों अथवा स्त्रियों के लिए सीमित करने का प्रश्न हो तो यह अवसर स्त्रियों को दिया जाए, क्योंकि उनके द्वारा ही भावी संतान को शिक्षा दी जा सकती है। किसी ने सही ही कहा है कि अगर आप एक आदमी को शिक्षित करोंगे तो एक व्यक्ति ही शिक्षित होगा, जबकि एक स्त्री को शिक्षित करने से पूरा परिवार, बल्कि सारा समाज शिक्षित होता है। ऐसे में बालिकाओं को शिक्षित करना सभी की प्राथमिकता होनी चाहिए। किसी ने बेटियों के सम्बन्ध में सही ही कहा है कि ‘ईश्वर नेे हमको दिया वरदान बेटियां। हम सबके मन की हैं अरमान बेटियां।। बिना हिचक करती हैं हर काम बेटियां, मानव जाति का आधार बेटियां।। बेटे और बेटी का भेदभाव सब त्याग दीजिए, हर क्षेत्र में बेटियों का सम्मान कीजिए।।’ वास्तव में बेटियों के अभाव में समाज की कल्पना भी नहीं की जा सकती।   

माँ, बहिन, पत्नी तथा बेटी को हृदय से पूरा सम्मान देकर ही विश्व को बचाया जा सकता है

आज समाज में महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक हिस्सेदारी बढ़ी है। महिलाओं ने महत्वपूर्ण व असरदार भूमिकाएँ निभा कर न सिर्फ पुरूषों के वर्चस्व को तोड़ा है, बल्कि पुरूष प्रधान समाज का ध्यान भी अपनी ओर आकर्षित किया है। आज विश्व में महिलाओं का शोषण सामाजिक स्तर पर भी है और सांस्कृतिक स्तर पर भी लेकिन सर्वाधिक शोषण घरेलु एवं सामाजिक स्तर पर है। नारी के चारों स्वरूप माँ, बहिन, पत्नी तथा बेटी को हृदय से पूरा सम्मान देकर ही विश्व को बचाया जा सकता है। वह मनुष्य के जीवन की जन्मदात्री भी है। महात्मा गांधी ने कहा था कि ‘‘जब आदमियों में स्त्रियोंचित्त गुण आ जायेंगे तो दुनिया में ‘रामराज्य’ आ जायेगा।’’

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आज बेटियां फौज से लेकर अन्तरिक्ष तक पुरूषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं

मेरा मानना है कि अनेक महापुरूषों के निर्माण में नारी का प्रत्यक्ष या परोक्ष योगदान रहा है। कहीं नारी प्रेरणा-स्रोत तथा कहीं निरन्तर आगे बढ़ने की शक्ति रही है। प्राचीन काल से ही नारी का महत्व स्वीकार किया गया है। नये युग का सन्देश लेकर आयी 21वीं सदी नारी शक्ति के अभूतपूर्व जागरण की है। जगत गुरू भारत से नारी के नये युग की शुरूआत हो चुकी है। आज बेटियां फौज से लेकर अन्तरिक्ष तक पुरूषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। स्वयं मुझे भी मेरी बेटी गीता, जो कि मेरी आध्यात्मिक माँ भी है, ने शिक्षा के माध्यम से ही मुझे बच्चों के निर्माण के लिए प्रेरित किया। आज मैं बच्चों की शिक्षा के माध्यम से जो थोड़ी बहुत समाज की सेवा कर पा रहा हूँ उसके पीछे मेरी पत्नी डा0 (श्रीमती) भारती गांधी एवं मेरी बेटी गीता का बहुत बड़ा योगदान है।

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Sanjeev Shukla

https://www.rashtrabandhu.com

He is a senior journalist recognized by the Government of India and has been contributing to the world of journalism for more than 20 years.

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