New Labour Codes: भारत में श्रम सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे चार श्रम संहिताएं (Labour Codes) अगले साल 1 अप्रैल 2026 से पूरी तरह से लागू होने की उम्मीद है। श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने बुधवार को सीआईआई इंडियाएज 2025 को संबोधित करते हुए यह बड़ा ऐलान किया। मंत्रालय ने इन अधिसूचित कानूनों के तहत नियमों को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार ने जिन चार श्रम संहिताओं को 21 नवंबर को अधिसूचित किया था, वे हैं: वेतन संहिता, 2019, औद्योगिक संबंध संहिता, 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कामकाज स्थिति संहिता, 2020।
नियम लागू करने की प्रक्रिया शुरू, जनता के लिए जल्द जारी होगा मसौदा
किसी भी कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सरकार को उसके तहत नियमों को अधिसूचित करना आवश्यक होता है। मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि, “चार श्रम संहिताओं के तहत मसौदा नियम प्रकाशित किए जाने से पहले जल्द ही सार्वजनिक किए जाएंगे।” उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले केंद्र और राज्य सरकारों ने नियमों के मसौदे को सार्वजनिक किया था, लेकिन वह काफी समय पहले की बात है, और अब मसौदे को वर्तमान समय के अनुरूप बनाने की आवश्यकता है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नियमों के मसौदे को प्रकाशित करने से पहले, सरकार अधिसूचना के लिए उन्हें अंतिम रूप देने से पहले जनता की टिप्पणियों को लेकर 45 दिन का समय देगी। अधिकारी ने यह भी बताया कि “सरकार का मकसद नए वित्त वर्ष की शुरुआत यानी एक अप्रैल से इन चारों संहिताओं के क्रियान्वयन के लिए नियम लागू करने का है।”
कर्मचारियों के लिए 8 घंटे का वर्किंग डे और ओवर टाइम का विकल्प
मंत्री मांडविया ने सम्मेलन में प्रश्नों का उत्तर देते हुए स्पष्ट किया कि नई संहिताओं के तहत एक कर्मचारी के लिए कार्य घंटे अभी भी आठ घंटे प्रतिदिन ही रहेंगे। इस प्रमुख श्रम सुधार में कुल 29 मौजूदा श्रम कानूनों को सुसंगत बनाते हुए एकीकृत किया गया है। मांडविया ने कहा कि नई रूपरेखा कर्मचारी को ‘ओवरटाइम’ का विकल्प प्रदान करती है, जो एक अंतरराष्ट्रीय चलन है।
इसके साथ ही, मंत्री ने मार्च 2026 तक 100 करोड़ श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लक्ष्य को पूरा करने की सरकार की मंशा का भी जिक्र किया। वर्तमान में यह संख्या 94 करोड़ है। उन्होंने बताया कि सामाजिक सुरक्षा का दायरा 2015 के 19 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 64 प्रतिशत से अधिक हो गया है।
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