Gen Z vs Millennials: आज के समय में फिटनेस, हेल्दी डाइट, योग, अच्छी नींद और मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों पर पहले से कहीं ज्यादा चर्चा हो रही है। खासकर Gen Z (नई पीढ़ी) को हेल्थ और वेलनेस के प्रति अधिक जागरूक माना जाता है। वहीं Millennials को लंबे समय तक काम करने, तनाव और व्यस्त जीवनशैली से जूझने वाली पीढ़ी के रूप में देखा जाता है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि केवल स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना और वास्तव में स्वस्थ होना, दोनों अलग-अलग बातें हैं।
नई रिपोर्ट और विशेषज्ञों की राय के अनुसार, Gen Z में हेल्थ अवेयरनेस जरूर बढ़ी है, लेकिन यह कहना सही नहीं होगा कि यह पीढ़ी हर मायने में Millennials से ज्यादा फिट और हेल्दी है।
हेल्थ को लेकर दोनों पीढ़ियों की सोच में आया बदलाव
विशेषज्ञों के मुताबिक, Millennials ने योग, जिम, हेल्दी खानपान, मेडिटेशन और वर्क-लाइफ बैलेंस जैसी आदतों को लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई। वहीं Gen Z ने इन आदतों को आगे बढ़ाते हुए मानसिक स्वास्थ्य, थेरेपी, बर्नआउट, भावनात्मक स्वास्थ्य और प्रिवेंटिव हेल्थ जैसे विषयों पर खुलकर बातचीत शुरू की।
जहां Millennials का मुख्य लक्ष्य अक्सर वजन कम करना और फिट दिखना होता था, वहीं Gen Z अब केवल वजन पर नहीं बल्कि मसल्स, बॉडी कंपोजिशन, फ्लेक्सिबिलिटी और ओवरऑल वेलनेस पर अधिक ध्यान दे रही है। विशेषज्ञ इसे सकारात्मक बदलाव मानते हैं, लेकिन यह भी कहते हैं कि स्वास्थ्य को लेकर जरूरत से ज्यादा चिंता भी मानसिक तनाव का कारण बन सकती है।
कम उम्र में बढ़ रही हैं लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां
रिपोर्ट के अनुसार, आज युवाओं में कई ऐसी बीमारियां कम उम्र में देखने को मिल रही हैं, जो पहले आमतौर पर अधिक उम्र में होती थीं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अब 30 से 40 वर्ष की आयु में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हार्ट अटैक जैसे मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसके पीछे लगातार तनाव, पर्याप्त नींद न लेना, लंबे समय तक बैठे रहना, असंतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी जैसी वजहें बताई गई हैं।
इसके अलावा युवाओं में चिंता (Anxiety), डिप्रेशन, अनिद्रा, मोटापा, पीसीओएस (PCOS) और शुरुआती डायबिटीज जैसी समस्याएं भी तेजी से बढ़ रही हैं।
मानसिक स्वास्थ्य को लेकर Gen Z की सोच ज्यादा खुली
विशेषज्ञों के अनुसार, Gen Z मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर पहले की पीढ़ियों की तुलना में अधिक खुलकर बात करती है। जरूरत पड़ने पर थेरेपी लेने या विशेषज्ञ की मदद लेने में भी यह पीढ़ी पहले की अपेक्षा कम झिझक महसूस करती है।
डॉक्टरों का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं पहले की तुलना में इसलिए अधिक सामने आ रही हैं क्योंकि अब लोग इन्हें छिपाने के बजाय स्वीकार कर रहे हैं। जागरूकता बढ़ने और इलाज के प्रति सकारात्मक सोच भी इसकी एक बड़ी वजह है।
डिजिटल लाइफस्टाइल बढ़ा रही मानसिक दबाव
विशेषज्ञों का कहना है कि Millennials और Gen Z तनाव से निपटने के अलग-अलग तरीके अपनाते हैं। जहां Millennials पुराने गाने सुनकर या पुरानी यादों को ताजा कर खुद को बेहतर महसूस करने की कोशिश करते हैं, वहीं Gen Z अक्सर सोशल मीडिया पर लगातार स्क्रॉलिंग (Doom Scrolling) का सहारा लेती है।
डॉक्टरों के मुताबिक, लगातार ऑनलाइन रहना, सोशल मीडिया पर दूसरों से तुलना करना, हर समय अपडेट रहने का दबाव और कुछ छूट जाने का डर (FOMO) मानसिक थकान और बर्नआउट की बड़ी वजह बनते जा रहे हैं। आधुनिक डिजिटल लाइफस्टाइल ने ऑनलाइन और ऑफलाइन जीवन के बीच की दूरी भी काफी कम कर दी है, जिससे मानसिक दबाव बढ़ रहा है।
(नोट: यह जानकारी विशेषज्ञों की राय और विभिन्न रिसर्च स्टडीज पर आधारित है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी नई फिटनेस दिनचर्या, व्यायाम या स्वास्थ्य संबंधी बदलाव को अपनाने से पहले डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।)
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