Illegal Content On Phone: मोबाइल फोन या क्लाउड स्टोरेज में रखा गया कोई भी गैर-कानूनी कंटेंट आपको गंभीर कानूनी मुसीबत में डाल सकता है। दिल्ली पुलिस ने ऐसे ही एक मामले में 10 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट (CSAM) को डाउनलोड करने, अपने पास रखने और साझा करने का आरोप है।
पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई पांच दिन तक चले विशेष अभियान के बाद की गई। जांच में सामने आया कि आरोपी कथित तौर पर क्लाउड स्टोरेज, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मोबाइल ऐप्स के जरिए इस अवैध सामग्री को डाउनलोड, स्टोर और प्रसारित कर रहे थे।
Google के डिटेक्शन सिस्टम से मिला इनपुट
पुलिस को इस मामले की जानकारी Google के कंटेंट डिटेक्शन सिस्टम के जरिए मिली। कंपनी अपनी सेवाओं पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट (Child Sexual Abuse Material – CSAM) की पहचान करने के लिए हैश मैचिंग (Hash Matching) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का उपयोग करती है।
हैश मैचिंग प्रक्रिया में किसी फोटो या वीडियो को एक यूनिक डिजिटल फिंगरप्रिंट (Hash) में बदला जाता है। जब कोई फाइल Google के सर्वर पर अपलोड होती है, तो उसका हैश पहले से मौजूद CSAM डेटाबेस से मिलाया जाता है। यदि दोनों का मिलान हो जाता है, तो सिस्टम स्वतः अलर्ट जारी कर देता है। इसके लिए फाइल को मैन्युअली खोलने की आवश्यकता नहीं होती।
यदि कोई नया या संशोधित आपत्तिजनक कंटेंट होता है, जिसका हैश डेटाबेस में उपलब्ध नहीं है, तो AI आधारित सिस्टम उसके पैटर्न का विश्लेषण कर संदिग्ध सामग्री की पहचान करने की कोशिश करता है।
Google से पुलिस तक कैसे पहुंचती है जानकारी?
जब Google के सिस्टम को अपनी सेवाओं पर ऐसा अवैध कंटेंट मिलता है, तो कंपनी संबंधित सामग्री को हटाने के साथ उसकी रिपोर्ट अमेरिका स्थित नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉयटेड चिल्ड्रेन (NCMEC) को भेजती है। इस रिपोर्ट में संबंधित अकाउंट और आवश्यक तकनीकी जानकारी शामिल होती है।
इसके बाद NCMEC यह सूचना संबंधित देश की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भेजता है, जहां स्थानीय पुलिस और जांच एजेंसियां मामले की जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करती हैं।
ऐसा कंटेंट रखना भी है अपराध
भारत में बच्चों के यौन शोषण से संबंधित अश्लील सामग्री (CSAM) को डाउनलोड करना, अपने पास रखना या किसी भी माध्यम से साझा करना कानूनन अपराध है। यदि कोई व्यक्ति मोबाइल फोन, कंप्यूटर, क्लाउड स्टोरेज या सोशल मीडिया अकाउंट पर इस तरह की सामग्री रखता या प्रसारित करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
ऐसे मामलों में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) कानूनों के साथ-साथ POCSO Act के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें गंभीर दंड का प्रावधान है।
क्या बच्चों के लिए बंद हो जाएगा सोशल मीडिया? 20 से ज्यादा देशों में सख्त नियमों की तैयारी
राष्ट्रबंधु की नवीनतम अपडेट्स पाने के लिए हमारा Facebook पेज लाइक करें, WhatsApp व YouTube पर हमें सब्सक्राइब करें, और अपने पसंदीदा आर्टिकल्स को शेयर करना न भूलें।
CHECK OUT LATEST SHOPPING DEALS & OFFERS
