Child Lock 2.0: बच्चों में बढ़ती स्मार्टफोन और सोशल मीडिया की लत को देखते हुए भारत सरकार एक नए सुरक्षा फीचर ‘Minor Mode’ को लेकर विचार कर रही है। प्रस्ताव के अनुसार, भविष्य में भारत में बिकने वाले स्मार्टफोन में बच्चों के लिए एक विशेष सुरक्षित मोड अनिवार्य किया जा सकता है। हालांकि, फिलहाल इस संबंध में कोई आधिकारिक ड्राफ्ट नियम या अधिसूचना जारी नहीं हुई है और मामला अभी विचाराधीन है।
यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी केवल माता-पिता की नहीं, बल्कि मोबाइल निर्माता कंपनियों और ऑपरेटिंग सिस्टम डेवलपर्स की भी होगी।
क्या है Minor Mode और कैसे करेगा काम?
Minor Mode को फोन के भीतर मौजूद एक सुरक्षित डिजिटल वातावरण के रूप में देखा जा रहा है। इस मोड में बच्चा केवल वही ऐप और कंटेंट इस्तेमाल कर सकेगा, जो उसकी उम्र के अनुरूप होगा।
इस फीचर के तहत माता-पिता यह तय कर सकेंगे कि कौन-से ऐप डाउनलोड किए जा सकते हैं, बच्चा प्रतिदिन कितने समय तक फोन इस्तेमाल करेगा और देर रात इंटरनेट या सोशल मीडिया अपने आप बंद हो जाएगा। साथ ही, आपत्तिजनक या उम्र के अनुकूल न होने वाले कंटेंट को फ़िल्टर किया जाएगा। हालांकि, पढ़ाई से जुड़े ऐप और आपातकालीन कॉल जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी।
क्या ऐसे फीचर पहले से मौजूद हैं?
दरअसल, इस तरह के पैरेंटल कंट्रोल फीचर पहले से कई स्मार्टफोन में उपलब्ध हैं। Apple के iPhone में Screen Time, Family Sharing, Child Account और Communication Safety जैसे फीचर पहले से दिए जाते हैं। हाल ही में कंपनी ने इन्हें और मजबूत किया है, जिससे बच्चे का अकाउंट बनाते ही उम्र के अनुसार कई सुरक्षा सेटिंग स्वतः सक्रिय हो जाती हैं।
इसी तरह Android स्मार्टफोन में Google का Family Link ऐप माता-पिता को स्क्रीन टाइम, ऐप डाउनलोड और कंटेंट एक्सेस नियंत्रित करने की सुविधा देता है।
फिर नए नियम की जरूरत क्यों महसूस हो रही है?
मौजूदा समय में ये सभी सुरक्षा फीचर वैकल्पिक (Optional) हैं और इन्हें सक्रिय करना माता-पिता की इच्छा पर निर्भर करता है। कई लोगों को इन सेटिंग्स की जानकारी नहीं होती या वे इन्हें उपयोग नहीं करते। अलग-अलग कंपनियों के इंटरफेस भी अलग होते हैं और कुछ बजट स्मार्टफोन में ये सुविधाएं सीमित होती हैं।
सरकार चाहती है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े फीचर हर स्मार्टफोन में एक समान, आसान और पहले से उपलब्ध हों, ताकि इन्हें अलग से खोजने या सेट करने की जरूरत न पड़े।
सरकार की चिंता क्यों बढ़ी?
सरकार की यह पहल बच्चों में बढ़ती डिजिटल लत को लेकर सामने आई चिंताओं से जुड़ी है। जनवरी 2026 में संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2026 में बच्चों में बढ़ते स्क्रीन टाइम और बिना फ़िल्टर वाले ऑनलाइन कंटेंट को सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर चुनौती बताया गया था।
सर्वेक्षण में सुझाव दिया गया था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर न्यूनतम आयु सीमा प्रभावी रूप से लागू की जाए। साथ ही, बच्चों के लिए केवल शैक्षणिक उपयोग वाले डिजिटल डिवाइस और संतुलित “डिजिटल डाइट” जैसे सुझाव भी दिए गए थे।
कई राज्यों ने भी शुरू की पहल
देश के कई राज्य भी बच्चों के स्मार्टफोन उपयोग को लेकर अलग-अलग स्तर पर काम कर रहे हैं। कर्नाटक सरकार 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के मोबाइल उपयोग को लेकर अध्ययन के लिए समिति गठित कर चुकी है। वहीं, आंध्र प्रदेश बाल अधिकार आयोग ने 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के स्मार्टफोन उपयोग पर रोक लगाने की सिफारिश की है। बिहार सरकार भी विशेषज्ञ संस्थानों की रिपोर्ट के आधार पर स्क्रीन टाइम नीति तैयार करने की दिशा में काम कर रही है।
चीन, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में क्या हैं नियम?
चीन ने स्मार्टफोन, ऐप और ऐप स्टोर में Minor Mode अनिवार्य करने का प्रस्ताव दिया है। प्रस्ताव के अनुसार 8 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रतिदिन 40 मिनट, 8 से 16 वर्ष तक के बच्चों के लिए एक घंटा और 16 से 18 वर्ष तक के किशोरों के लिए अधिकतम दो घंटे स्क्रीन टाइम निर्धारित किया गया है।
इसके अलावा रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक इंटरनेट एक्सेस स्वतः बंद करने का भी प्रावधान प्रस्तावित है। हालांकि, पढ़ाई और आपातकालीन सेवाओं से जुड़े ऐप इस प्रतिबंध से बाहर रहेंगे।
ब्रिटेन भी किशोरों के लिए डिजिटल कर्फ्यू जैसे नियमों पर विचार कर रहा है। फ्रांस में पहले से ही प्रत्येक इंटरनेट कनेक्टेड डिवाइस में पैरेंटल कंट्रोल की सुविधा अनिवार्य है, जबकि ऑस्ट्रेलिया 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रतिबंध लागू कर चुका है।
भारत में आगे क्या होगा?
यदि सरकार इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाती है, तो सबसे पहले मसौदा नियम (Draft Rules) जारी किए जा सकते हैं। इसके बाद उद्योग जगत और आम लोगों से सुझाव लिए जाएंगे। साथ ही यह भी तय होगा कि Minor Mode लागू करने की जिम्मेदारी स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों की होगी या फिर ऑपरेटिंग सिस्टम विकसित करने वाली कंपनियों, जैसे Google और Apple की।
इस प्रस्ताव के साथ गोपनीयता (Privacy), उम्र की पुष्टि (Age Verification) और बच्चों के डेटा की सुरक्षा जैसे कई अहम मुद्दों पर भी व्यापक चर्चा होने की संभावना है।
राष्ट्रबंधु की नवीनतम अपडेट्स पाने के लिए हमारा Facebook पेज लाइक करें, WhatsApp व YouTube पर हमें सब्सक्राइब करें, और अपने पसंदीदा आर्टिकल्स को शेयर करना न भूलें।
CHECK OUT LATEST SHOPPING DEALS & OFFERS
