देश के एक बड़े सरकारी बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा में है। सरकार इस बैंक में अपनी बड़ी हिस्सेदारी बेचने की योजना पर आगे बढ़ रही है और इस डील में Fairfax सबसे आगे बताई जा रही है। ऐसे में अगर आपका भी इस बैंक में खाता है, तो आपके लिए यह खबर अहम है। सवाल यह है कि सरकार की हिस्सेदारी बिकने के बाद बैंक के ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा?
IDBI बैंक में हिस्सेदारी बेचने की तैयारी
दरअसल, सरकार IDBI बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचने की योजना पर लंबे समय से काम कर रही है। इसको लेकर कई संभावित निवेशकों के साथ बातचीत की जा रही है। मौजूदा स्थिति में Fairfax इस डील के लिए सबसे प्रमुख दावेदारों में शामिल है।
सरकार के पास IDBI बैंक में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार और Fairfax के बीच बैंक की कीमत को लेकर अभी अंतिम सहमति नहीं बनी है। यानी डील की कीमत को लेकर बातचीत अभी जारी है।
Fairfax ने कितनी कीमत की पेशकश की?
रिपोर्ट्स के अनुसार, Fairfax ने IDBI बैंक के लिए करीब 81 रुपये प्रति शेयर की पेशकश की है। इस कीमत के आधार पर सरकार की हिस्सेदारी की कुल वैल्यू लगभग 53,000 करोड़ रुपये आंकी जा रही है।
बताया जा रहा है कि इसी प्रस्तावित कीमत को लेकर वित्त मंत्रालय में सोमवार को शीर्ष स्तर के अधिकारियों की बैठक भी हुई। सरकार यह आकलन कर रही है कि Fairfax की ओर से दी गई पेशकश उसकी उम्मीदों के अनुरूप है या नहीं।
IDBI बैंक के शेयर में आई बड़ी गिरावट
IDBI बैंक के निजीकरण से जुड़ी खबर सामने आने के बाद मंगलवार को बैंक के शेयर में बड़ा दबाव देखने को मिला। कारोबार के दौरान IDBI बैंक के शेयर में करीब 11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
Fairfax पहले से ही भारत की वित्तीय कंपनियों में निवेश कर रही है। कंपनी के पास IIFL Finance में करीब 15.2 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसके अलावा Fairfax की CSB Bank में भी लगभग 40 प्रतिशत हिस्सेदारी बताई जाती है।
अगर Fairfax को IDBI बैंक की करीब 60.7 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल होती है, तो भारतीय बैंकिंग नियमों के कारण उसे अपने कुछ मौजूदा भारतीय निवेशों में बदलाव करना पड़ सकता है।
ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर?
IDBI बैंक के ग्राहकों के लिए फिलहाल राहत की बात यह है कि बैंक के निजीकरण से उनकी रोजमर्रा की बैंकिंग सेवाओं पर सीधे तौर पर कोई बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। बैंक का संचालन पहले की तरह जारी रहेगा और मौजूदा योजनाएं भी चलती रहेंगी।
खाताधारकों को मिलने वाली बैंकिंग सुविधाएं भी जारी रहने की संभावना है। मुख्य बदलाव बैंक के स्वामित्व को लेकर होगा। यानी सरकार की हिस्सेदारी घटने के बाद बैंक का नियंत्रण निजी हाथों में जा सकता है, लेकिन ग्राहकों के लिए बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहेंगी।
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