चीनी की नई पेराई सीजन से पहले वैश्विक बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। मार्केट एनालिस्ट ‘ग्रीन पूल कमोडिटीज’ के अनुमान के मुताबिक, साल 2026-27 में दुनिया भर में चीनी की आपूर्ति में 6.28 मिलियन टन यानी करीब 62.8 लाख टन की कमी हो सकती है। इसकी प्रमुख वजह खराब मौसम और फसलों की पैदावार में गिरावट बताई जा रही है। ब्राजील, भारत और यूरोपीय संघ में उत्पादन प्रभावित होने की आशंका के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है।
चीनी की सप्लाई पर क्यों मंडरा रहा संकट?
मौसम में बदलाव का असर दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादक क्षेत्रों पर दिखाई दे रहा है। ब्राजील में ‘एल नीनो’ के प्रभाव के बीच बेमौसम भारी बारिश से चीनी उत्पादन प्रभावित हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में इस साल चीनी का उत्पादन पिछले साल की तुलना में 14 प्रतिशत कम रहा है। इस स्थिति को देखते हुए ग्रीन पूल कमोडिटीज ने ब्राजील के मध्य-दक्षिणी क्षेत्र में चीनी उत्पादन का अनुमान 6 लाख टन घटाकर 37.3 मिलियन टन कर दिया है।
यूरोपीय संघ में भी चीनी उत्पादन घटने की आशंका
यूरोपीय संघ में भी खराब मौसम के कारण चीनी उत्पादन को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। गर्मियों में लंबे समय तक भीषण गर्मी और सूखे की स्थिति ने शुगर बीट यानी चुकंदर की फसल को प्रभावित किया है। इसके चलते ग्रीन पूल ने यूरोपीय संघ के चीनी उत्पादन के अनुमान में 2.28 लाख टन की कटौती करते हुए इसे 12.44 मिलियन टन कर दिया है।
ग्रीन पूल के मुताबिक, उत्पादन के अनुमान में आगे भी कटौती की जा सकती है। यदि ऐसा होता है, तो यूरोपीय बाजार में चीनी की उपलब्धता सीमित हो सकती है। इससे क्षेत्र की आयात मांग पर भी असर पड़ने की आशंका है।
भारत में चीनी की सप्लाई पर क्या होगा असर?
भारत में भी चीनी की उपलब्धता को लेकर चिंता बनी हुई है। घरेलू स्टॉक सीमित होने के कारण सरकार ने गन्ने की नई फसल की प्रोसेसिंग जल्दी शुरू करने का फैसला किया है। हालांकि, गन्ने के पूरी तरह पकने से पहले कटाई करने पर चीनी उत्पादन में 3 से 4 लाख टन तक का नुकसान होने का अनुमान है।
महाराष्ट्र और कर्नाटक में मानसून के अंतिम दौर में कम बारिश ने स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। पानी की कमी के चलते खेती के लिए जलाशयों के पानी के इस्तेमाल पर पाबंदियां लगने की आशंका है। इससे आने वाले समय में गन्ने की खेती और चीनी उत्पादन पर अतिरिक्त जोखिम पैदा हो सकता है।
19 महीने के उच्च स्तर पर पहुंचे कच्ची चीनी के वायदा भाव
वैश्विक सप्लाई में संभावित कमी का असर बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। कच्ची चीनी के वायदा भाव बढ़कर 21.29 सेंट प्रति पाउंड पर पहुंच गए हैं, जो 19 महीने का उच्च स्तर बताया जा रहा है।
आने वाले समय में चीनी की कीमतों की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि ब्राजील, भारत और यूरोपीय संघ में वास्तविक उत्पादन कितना रहता है और मौसम किस तरह का रुख अपनाता है। यदि प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में फसल प्रभावित होती है और सप्लाई में कमी बनी रहती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
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