Oldest School in India: भारत की शिक्षा परंपरा सदियों पुरानी रही है। प्राचीन काल में गुरुकुल और पाठशालाएं शिक्षा के प्रमुख केंद्र हुआ करती थीं, लेकिन आधुनिक स्कूल प्रणाली की बात करें तो देश का एक ऐसा संस्थान है, जो पिछले तीन सौ वर्षों से लगातार शिक्षा प्रदान कर रहा है। यही वजह है कि इसे भारत का सबसे पुराना लगातार संचालित होने वाला स्कूल माना जाता है।
यह ऐतिहासिक स्कूल तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में स्थित सेंट जॉर्ज एंग्लो इंडियन हायर सेकेंडरी स्कूल है। वर्ष 1715 में स्थापित यह संस्थान आज भी अपनी समृद्ध विरासत के साथ हजारों विद्यार्थियों को शिक्षा दे रहा है।
अनाथ बच्चों की शिक्षा के उद्देश्य से हुई थी शुरुआत
सेंट जॉर्ज एंग्लो इंडियन हायर सेकेंडरी स्कूल की स्थापना वर्ष 1715 में मिलिट्री मेल ऑर्फन असायलम के रूप में की गई थी। उस समय इसका उद्देश्य तत्कालीन मद्रास (अब चेन्नई) में तैनात ब्रिटिश सैनिकों के अनाथ बच्चों को शिक्षा और देखभाल उपलब्ध कराना था।
समय के साथ यह संस्थान विकसित होता गया और बाद में इसे एक पूर्ण शैक्षणिक विद्यालय का स्वरूप मिला। आज यह देश के सबसे प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक स्कूलों में गिना जाता है।
तीन सदियों के इतिहास का रहा साक्षी
करीब 300 वर्षों से अधिक समय से संचालित यह स्कूल ब्रिटिश शासन, भारत के स्वतंत्रता आंदोलन, वर्ष 1947 में देश की आजादी और उसके बाद शिक्षा व्यवस्था में हुए कई महत्वपूर्ण बदलावों का गवाह रहा है।
इतिहास से जुड़ा होने के बावजूद यह स्कूल आज भी पूरी तरह सक्रिय है। चेन्नई के शेनॉय नगर स्थित इस विद्यालय में नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक की पढ़ाई होती है और वर्तमान में यहां 1,500 से अधिक छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
आधुनिक शिक्षा के साथ विरासत का अनूठा संगम
स्कूल की ऐतिहासिक इमारत और इसका चैपल चेन्नई की प्रमुख विरासत संरचनाओं में शामिल हैं। यहां अंग्रेजी माध्यम से विज्ञान, वाणिज्य, कला सहित विभिन्न विषयों की शिक्षा दी जाती है।
पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। यह संस्थान विशेष रूप से अपनी मजबूत हॉकी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यहां से शिक्षा प्राप्त कर चुके कई खिलाड़ियों ने तमिलनाडु और भारत का राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व किया है।
इसी कारण सेंट जॉर्ज एंग्लो इंडियन हायर सेकेंडरी स्कूल केवल अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए ही नहीं, बल्कि खेल और विरासत के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए भी एक विशेष पहचान रखता है।
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