नई कार की बढ़ती कीमतों के बीच बहुत से लोग सेकंड हैंड कार खरीदना पसंद करते हैं। कम बजट में अपनी पसंद की कार मिल जाना इसे एक अच्छा विकल्प बनाता है। हालांकि, पुरानी कार खरीदते समय सिर्फ उसकी कीमत और बाहरी लुक देखकर फैसला करना नुकसानदायक हो सकता है। कई बार चमचमाती कार के इंजन, गियरबॉक्स या इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में गंभीर खराबी छिपी होती है। ऐसी कार खरीदने के बाद मरम्मत पर हजारों रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं। इसलिए पुरानी कार खरीदने से पहले कुछ जरूरी बातों की जांच करना बेहद जरूरी है।
1. पानी में डूबी या बड़े एक्सीडेंट वाली कार न खरीदें
सेकंड हैंड कार खरीदते समय सबसे पहले यह पता करें कि कार कभी बाढ़ या भारी बारिश के पानी में डूबी तो नहीं थी। पानी में डूबने से कार के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, वायरिंग और सेंसर को नुकसान पहुंच सकता है। कई बार शुरुआत में कार सामान्य रूप से चलती है, लेकिन कुछ समय बाद इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स में खराबी आने लगती है। कार के अंदर सीलन और बदबू भी पानी में डूबने का संकेत हो सकती है।
इसी तरह, ऐसी कार खरीदने से बचें जिसका बड़ा एक्सीडेंट हुआ हो और चेसिस या फ्रेम को नुकसान पहुंचा हो। कार का बाहरी हिस्सा ठीक कर देने से उसकी अंदरूनी मजबूती वापस आना जरूरी नहीं है। क्षतिग्रस्त ढांचा सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकता है। इसलिए खरीदने से पहले किसी भरोसेमंद मैकेनिक या पेशेवर कार इंस्पेक्शन सर्विस से इसकी जांच कराएं।
2. बिना जरूरी कागजात और सर्विस रिकॉर्ड वाली कार से बचें
पुरानी कार खरीदते समय उसके सभी जरूरी दस्तावेजों की जांच करना बेहद जरूरी है। कार की रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC), वैध इंश्योरेंस और अन्य संबंधित कागजात जरूर देखें। अगर विक्रेता दस्तावेज दिखाने से बच रहा है या जानकारी स्पष्ट नहीं दे रहा है, तो जल्दबाजी में सौदा न करें।
कार की सर्विस हिस्ट्री भी जरूर जांचें। इससे पता चल सकता है कि समय पर सर्विस कराई गई है या नहीं और पहले किन पार्ट्स की मरम्मत हुई है। अगर ओडोमीटर पर कम किलोमीटर दिख रहे हैं, लेकिन सर्विस रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, तो कार की वास्तविक दूरी की पुष्टि करना जरूरी है। कुछ मामलों में ओडोमीटर से छेड़छाड़ करके कार कम चली हुई दिखाई जा सकती है।
इसके अलावा, अगर कार पर बैंक का लोन बकाया है, तो खरीदने से पहले लोन चुकाने, बैंक से जरूरी दस्तावेज लेने और वाहन पर किसी वित्तीय बकाया या प्रतिबंध की स्थिति स्पष्ट करने की पुष्टि करें। ऐसा न करने पर कार अपने नाम ट्रांसफर कराने में परेशानी हो सकती है।
3. बंद हो चुके मॉडल की कार खरीदने से पहले सोचें
कुछ पुरानी कारों के मॉडल बंद हो चुके हैं या उनकी कंपनियों ने भारत में कारोबार समेट लिया है। ऐसी कार खरीदना हमेशा गलत नहीं होता, लेकिन उससे पहले यह पता लगाना जरूरी है कि उसके स्पेयर पार्ट्स आसानी से उपलब्ध हैं या नहीं।
अगर जरूरी पार्ट्स बाजार में नहीं मिलते, तो कार खराब होने पर मरम्मत में ज्यादा समय और पैसा लग सकता है। इसलिए कार की कीमत के साथ उसके रखरखाव, सर्विस नेटवर्क और पार्ट्स की उपलब्धता का भी आकलन करें। कम कीमत पर मिल रही कार भविष्य में महंगी साबित हो सकती है, अगर उसकी मरम्मत कराना मुश्किल हो।
4. पहले टैक्सी के रूप में इस्तेमाल हुई कार की अच्छी तरह जांच करें
पहले टैक्सी के रूप में इस्तेमाल की गई कार खरीदते समय अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है। ऐसी कारें कई बार लंबे समय तक और ज्यादा दूरी तक चलाई जाती हैं। इससे इंजन, क्लच, ब्रेक और सस्पेंशन जैसे हिस्सों पर अधिक घिसावट हो सकती है।
कार की टेस्ट ड्राइव के दौरान कुछ संकेतों पर खास ध्यान दें। अगर साइलेंसर से नीला धुआं निकलता है, गियर बदलते समय झटके लगते हैं या कार एक तरफ खिंचती है, तो इसे नजरअंदाज न करें। ये इंजन, गियरबॉक्स, टायर या सस्पेंशन से जुड़ी समस्याओं के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में कार खरीदने से पहले विशेषज्ञ से जांच और संभावित मरम्मत का खर्च पता कर लें।
5. सिर्फ कम कीमत और अच्छे लुक पर भरोसा न करें
सेकंड हैंड कार खरीदते समय कम कीमत का आकर्षण कई बार खरीदार को जल्द फैसला लेने के लिए प्रेरित करता है। लेकिन कार का बाहरी लुक उसके इंजन, गियरबॉक्स और दूसरे महत्वपूर्ण हिस्सों की वास्तविक स्थिति नहीं बताता। इसलिए खरीदने से पहले इंजन, ब्रेक, क्लच, गियरबॉक्स, सस्पेंशन, टायर और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की जांच कराएं।
कार की टेस्ट ड्राइव जरूर लें और उसके दस्तावेजों में दर्ज जानकारी का मिलान उपलब्ध रिकॉर्ड से करें। जरूरत पड़ने पर स्वतंत्र मैकेनिक से प्री-पर्चेज इंस्पेक्शन कराना बेहतर विकल्प है। इससे संभावित खराबियों और भविष्य में आने वाले खर्च का अंदाजा मिल सकता है।
Second Hand Car खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
पुरानी कार खरीदकर पैसे बचाना तभी फायदेमंद है, जब कार की हालत अच्छी हो और उसके कागजात सही हों। पानी में डूबी या गंभीर दुर्घटना का शिकार हुई कार, अधूरे दस्तावेज, संदिग्ध किलोमीटर रीडिंग और महंगे स्पेयर पार्ट्स जैसी समस्याओं की अनदेखी न करें। सही जांच और सोच-समझकर लिया गया फैसला आपको गलत सौदे और भविष्य में होने वाले बड़े खर्च से बचा सकता है।
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