Homeटेक एंड यूथमोबाइल-कंप्यूटरHash Matching Technology क्या है? Google गैलरी की फोटो-वीडियो कैसे पहचानता है,...

Hash Matching Technology क्या है? Google गैलरी की फोटो-वीडियो कैसे पहचानता है, जानिए इस टेक्नोलॉजी का पूरा खेल

Hash Matching Technology: हाल ही में एक मामले में Google की ओर से मिले अलर्ट के आधार पर दिल्ली पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की। इसके बाद लोगों के मन में सवाल उठने लगे कि आखिर Google को किसी डिवाइस या क्लाउड पर मौजूद संदिग्ध कंटेंट की जानकारी कैसे मिलती है। इसका जवाब Hash Matching Technology में छिपा है।

यह तकनीक डिजिटल फाइलों की पहचान करने के लिए इस्तेमाल की जाती है। इसकी मदद से किसी फोटो या वीडियो को सीधे देखे बिना भी यह पता लगाया जा सकता है कि वह किसी पहले से ज्ञात डिजिटल कंटेंट से मेल खाता है या नहीं।

क्या है Hash Matching Technology?

Hash Matching Technology में किसी फोटो या वीडियो को एक यूनिक डिजिटल फिंगरप्रिंट (Hash) में बदला जाता है। यह फिंगरप्रिंट एक विशेष गणितीय (Mathematical) एल्गोरिद्म के जरिए तैयार होता है और हर डिजिटल फाइल की एक अलग पहचान बनाता है।

इसे ऐसे समझ सकते हैं जैसे हर व्यक्ति के फिंगरप्रिंट अलग होते हैं, उसी तरह हर डिजिटल फाइल का भी अपना अलग हैश होता है। यह प्रक्रिया One-Way होती है, यानी हैश से मूल फोटो या वीडियो को दोबारा तैयार नहीं किया जा सकता।

इसके अलावा, हैश का आकार मूल फाइल की तुलना में काफी छोटा होता है, जिससे उसे स्टोर करना और तुलना करना आसान हो जाता है।

Hashing के दो प्रमुख प्रकार

1. Cryptographic Hashing

क्रिप्टोग्राफिक हैशिंग किसी फाइल का बिल्कुल सटीक डिजिटल फिंगरप्रिंट तैयार करती है। यदि फोटो या वीडियो में एक पिक्सल का भी बदलाव कर दिया जाए तो उसका हैश पूरी तरह बदल जाता है।

इस तकनीक की मदद से पहले से पहचाने गए कंटेंट की एकदम समान (Exact Copy) की पहचान की जा सकती है। हालांकि यदि उस फाइल में बदलाव किया गया हो, तो केवल यही तकनीक उसे पहचानने में सक्षम नहीं होती।

2. Perceptual Hashing

परसेप्चुअल हैशिंग फाइल के केवल डेटा को नहीं बल्कि उसके दृश्य स्वरूप (Visual Pattern) को भी पहचानने की क्षमता रखती है।

उदाहरण के तौर पर, जैसे किसी व्यक्ति का हेयरस्टाइल बदल जाए लेकिन आप उसे फिर भी पहचान लेते हैं, उसी तरह यह तकनीक किसी फोटो या वीडियो में क्रॉप, रिसाइज, फिल्टर या अन्य छोटे बदलाव होने के बाद भी उसकी पहचान कर सकती है।

संदिग्ध कंटेंट की पहचान कैसे होती है?

जब कोई फाइल Google के सर्वर पर अपलोड होती है, तो उसका हैश पहले से मौजूद ज्ञात हैश डेटाबेस से मिलाया जा सकता है। यदि दोनों का मिलान हो जाता है, तो सिस्टम स्वतः अलर्ट जनरेट कर सकता है।

यदि किसी फाइल का हैश पहले से डेटाबेस में मौजूद नहीं है, तो आधुनिक AI आधारित सिस्टम उसके पैटर्न और विशेषताओं का विश्लेषण कर संभावित मिलान या संदिग्ध सामग्री की पहचान करने में सहायता कर सकते हैं। इस तरह संशोधित या नए प्रकार के कंटेंट का भी पता लगाने में मदद मिलती है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि हैश मैचिंग तकनीक का उपयोग डिजिटल सुरक्षा, अवैध सामग्री की पहचान और प्लेटफॉर्म की सुरक्षा नीतियों को लागू करने जैसे उद्देश्यों के लिए किया जाता है।

X Fake Login Alert: फर्जी ईमेल से रहें सावधान, एक क्लिक में हैक हो सकता है आपका अकाउंट

राष्ट्रबंधु की नवीनतम अपडेट्स पाने के लिए हमारा Facebook पेज लाइक करें, WhatsAppYouTube पर हमें सब्सक्राइब करें, और अपने पसंदीदा आर्टिकल्स को शेयर करना न भूलें।

CHECK OUT LATEST SHOPPING DEALS & OFFERS

Arvind Maurya
Arvind Mauryahttps://www.rashtrabandhu.com
I love writing newsworthy/generally valuable articles. Our passion is to read & learn new things on a routine basis and share them across the net. Professionally I'm a Developer/Technical Consultant, so most of our time goes to discovering & develop new things.
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular