पिछले कुछ महीनों से महंगी चीनी की वजह से परेशान लोगों के लिए अब राहत की खबर सामने आई है। चीनी की कीमतों में गिरावट शुरू होने के बाद केंद्र सरकार ने बल्क में चीनी खरीदने और उसका स्टॉक रखने के नियमों में बदलाव किया है। नए नियम के तहत बड़ी मात्रा में चीनी इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ता अब 30 दिनों तक का स्टॉक रख सकेंगे।
इससे पहले बल्क कंज्यूमर्स को अधिकतम 15 दिनों की खपत के बराबर चीनी स्टॉक करने की अनुमति थी। सरकार ने अब इस सीमा को बढ़ाकर 30 दिन कर दिया है। हालांकि, अतिरिक्त 15 दिनों का स्टॉक रखने के लिए एक अहम शर्त भी लागू की गई है।
15 दिन से ज्यादा का स्टॉक सिर्फ Imported Sugar से
सरकार के नए नियम के मुताबिक, 15 दिनों की निर्धारित सीमा से ज्यादा चीनी का स्टॉक केवल आयातित चीनी के जरिए रखा जा सकेगा। इसके लिए आयात की गई चीनी का एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम या टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत आना जरूरी होगा।
वहीं, ओपन मार्केट से खरीदी गई घरेलू चीनी के स्टॉक की सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ऐसी चीनी का स्टॉक अब भी अधिकतम 15 दिनों की खपत तक ही रखा जा सकेगा।
चीनी की कीमतों में कितनी आई गिरावट?
सरकार की ओर से बताया गया है कि अगस्त में चीनी की खुदरा कीमत करीब 65 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थी। अब इसमें गिरावट आई है और खुदरा बाजार में चीनी की कीमत करीब 58.50 रुपये प्रति किलो रह गई है।
इस हिसाब से खुदरा कीमत में लगभग 10 फीसदी की कमी आई है। हालांकि, मिल स्तर पर चीनी की कीमतों में करीब 25 फीसदी की गिरावट बताई गई है। सरकार का कहना है कि मिल स्तर पर कीमत घटने से जितनी राहत मिली है, उसका पूरा फायदा अभी तक आम उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा है।
सरकार ने व्यापारियों को दिया कीमत घटाने का संदेश
चीनी की कीमतों में मिल स्तर पर आई कमी को देखते हुए सरकार ने व्यापारियों और थोक विक्रेताओं से कहा है कि कम कीमत पर मिल से मिलने वाली चीनी का लाभ ग्राहकों तक भी पहुंचाया जाए।
दरअसल, त्योहारी सीजन के दौरान चीनी की खपत बढ़ जाती है। ऐसे समय में कीमतों में कमी आने से घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ बड़ी मात्रा में चीनी इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों को भी राहत मिल सकती है।
क्या आगे और सस्ती हो सकती है चीनी?
सरकार की ओर से स्टॉक सीमा में बदलाव और बाजार में कीमतों में आई गिरावट के बीच चीनी की कीमतों पर आगे भी असर पड़ने की संभावना है। हालांकि, खुदरा कीमतों में कितनी और कब तक कमी आती है, यह बाजार की स्थिति और सप्लाई समेत कई कारकों पर निर्भर करेगा।
फिलहाल सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करने पर है कि चीनी की कीमतों में मिल स्तर पर आई कमी का फायदा खुदरा बाजार में भी उपभोक्ताओं को मिले।
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