दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे प्रदर्शन में AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष Neha Bora प्रमुख चेहरों में नजर आ रही हैं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ उनकी झड़प और भाषणों के वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। हाल के दिनों में वह एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आई हैं।
इससे पहले भी नेहा बोरा छात्र आंदोलनों को लेकर चर्चा में रही हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े छात्र आंदोलन के दौरान भी उनकी सक्रिय भूमिका रही थी। जुलाई 2026 में वह जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर 23 दिन की भूख हड़ताल करने वाले AISA के तीन छात्र नेताओं में शामिल थीं।
नेहा बोरा की सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि छात्र आंदोलनों के दौरान उनकी मुलाकात और संवाद कई विपक्षी नेताओं और सार्वजनिक हस्तियों से भी हुआ। ऐसे में लोगों के बीच यह जानने की दिलचस्पी बढ़ी है कि आखिर नेहा बोरा कौन हैं, उनका संबंध कहां से है और JNU में वह किस विषय पर रिसर्च कर रही हैं।
JNU में किस विषय की पढ़ाई कर रही हैं Neha Bora?
नेहा बोरा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की PhD स्कॉलर हैं और स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स से थिएटर एवं परफॉर्मेंस स्टडीज में शोध कर रही हैं। पढ़ाई के साथ-साथ वह छात्र राजनीति और सामाजिक आंदोलनों में भी सक्रिय रही हैं। मौजूदा समय में वह ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।
शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली, छात्र अधिकार और अन्य सामाजिक मुद्दों को लेकर आंदोलनों में उनकी सक्रिय भागीदारी रही है। 23 दिन की भूख हड़ताल के दौरान भी वह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आई थीं।
उत्तराखंड के खटीमा की रहने वाली हैं नेहा बोरा
नेहा बोरा मूल रूप से उत्तराखंड के खटीमा की रहने वाली हैं। उनका परिवार सैन्य पृष्ठभूमि से जुड़ा रहा है और उनके पिता भारतीय सेना में थे। इसी वजह से उनका बचपन देश के अलग-अलग हिस्सों में बीता।
उनकी शुरुआती स्कूली शिक्षा पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से समाजशास्त्र में ग्रेजुएशन किया। आगे उन्होंने डॉ. बी. आर. आंबेडकर यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री हासिल की और बाद में JNU में शोध के लिए दाखिला लिया।
थिएटर से शुरू हुआ सार्वजनिक जीवन का सफर
नेहा बोरा की पहचान सिर्फ छात्र नेता के तौर पर नहीं है। उनका जुड़ाव थिएटर से भी रहा है। कॉलेज के दिनों में वह ‘संगवारी’ नाम के थिएटर ग्रुप से जुड़ी थीं। नुक्कड़ नाटकों और रंगमंच के जरिए उन्होंने सामाजिक मुद्दों और आम लोगों से जुड़े सवालों को करीब से समझा।
थिएटर से मिला अनुभव बाद में उनके सार्वजनिक जीवन में भी दिखाई दिया। भाषणों और आंदोलनों के दौरान अपनी बात प्रभावी तरीके से रखने की उनकी शैली ने उन्हें छात्र राजनीति में अलग पहचान दिलाई।
AISA से जुड़कर छात्र राजनीति में बनाई पहचान
JNU पहुंचने के बाद नेहा बोरा वामपंथी छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी AISA से जुड़ीं। संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते हुए वह राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद तक पहुंचीं। छात्र राजनीति में उन्होंने शिक्षा के निजीकरण, फीस बढ़ोतरी, हॉस्टल से जुड़ी समस्याओं, महिला सुरक्षा और परीक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों को उठाया है।
23 दिन की भूख हड़ताल से मिली राष्ट्रीय पहचान
2026 में NEET और अन्य परीक्षा व्यवस्था से जुड़े विवादों के बीच जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन में नेहा बोरा ने 23 दिनों तक भूख हड़ताल की। उनके साथ AISA के अन्य छात्र नेता भी इस आंदोलन में शामिल थे। 23वें दिन विपक्षी सांसदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अन्य सार्वजनिक हस्तियों की अपील के बाद भूख हड़ताल समाप्त की गई, जबकि आंदोलन को दूसरे तरीकों से जारी रखने की बात कही गई।
इसके बाद नेहा बोरा छात्र आंदोलनों का एक प्रमुख चेहरा बनकर उभरीं। अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन में उनकी सक्रियता ने उन्हें फिर सुर्खियों में ला दिया है।
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