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Supreme Court Judge Recruitment: जज बनने की 3 साल वकालत की शर्त खत्म, अब 1 साल प्रैक्टिस के बाद मिलेगा मौका

सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के पद पर सीधी भर्ती के लिए तीन साल की वकालत की अनिवार्यता में बड़ा बदलाव किया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को पुनर्विचार याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए प्रैक्टिस की न्यूनतम अवधि को तीन साल से घटाकर एक साल कर दिया।

हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल एक साल की वकालत के आधार पर चयनित उम्मीदवार सीधे नियमित जज के रूप में काम नहीं कर सकेंगे। नियुक्ति से पहले उन्हें एक साल की ज्यूडिशियल अकादमी ट्रेनिंग और एक साल की क्लर्कशिप पूरी करनी होगी। इस तरह उम्मीदवारों को न्यायिक सेवा में आने से पहले कुल दो साल का अतिरिक्त व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा।

3 साल की जगह अब 1 साल की वकालत जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 20 मई 2025 को दिए अपने फैसले में न्यायिक सेवा में सीधे प्रवेश से पहले कम से कम तीन साल की वकालत को जरूरी किया था। उस समय अदालत का मानना था कि जज बनने वाले उम्मीदवारों के लिए अदालत में व्यावहारिक कानूनी अनुभव आवश्यक है।

अब पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मूल फैसले के इस सिद्धांत को बरकरार रखा कि न्यायिक सेवा में प्रवेश करने से पहले उम्मीदवारों के पास व्यावहारिक अनुभव होना चाहिए। हालांकि, तीन साल की प्रैक्टिस की शर्त को घटाकर एक साल कर दिया गया है।

यह फैसला सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने 2:1 के बहुमत से सुनाया है।

जज बनने से पहले 2 साल की Training और Clerkship

नई व्यवस्था के तहत सिविल जज के पद के लिए चयनित उम्मीदवारों को सीधे अदालत में जज की जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। उन्हें पहले एक साल तक राज्य की ज्यूडिशियल अकादमी में प्रशिक्षण लेना होगा।

इसके बाद उम्मीदवारों को एक साल की क्लर्कशिप करनी होगी। क्लर्कशिप के पहले छह महीने जिला जज या हायर ज्यूडिशियल सर्विस के किसी अधिकारी के साथ काम करना होगा। इसके बाद अगले छह महीने हाई कोर्ट के किसी सिटिंग जज के साथ व्यावहारिक अनुभव हासिल करना होगा।

इस व्यवस्था के जरिए सुप्रीम कोर्ट का उद्देश्य नए जजों को अदालत की कार्यप्रणाली, न्यायिक प्रक्रिया और वास्तविक मामलों से जुड़ा पर्याप्त अनुभव देना है।

Law Graduates को बड़ी राहत, लेकिन नियम समझना जरूरी

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से उन लॉ ग्रेजुएट्स को राहत मिल सकती है जो लंबे समय तक वकालत करने के बजाय जल्दी न्यायिक सेवा में अपना करियर शुरू करना चाहते हैं। हालांकि, उन्हें एक साल की अनिवार्य प्रैक्टिस पूरी करनी होगी और चयन के बाद निर्धारित ट्रेनिंग व क्लर्कशिप भी करनी होगी।

अदालत ने यह भी माना कि पिछले फैसले के बाद काफी समय बीत चुका है। इसी को देखते हुए आवेदन करने वाले लॉ ग्रेजुएट्स के लिए फिलहाल एक विशेष व्यवस्था की गई है।

31 मार्च 2027 तक आवेदन करने वालों को मिलेगी राहत

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 31 मार्च 2027 तक जज भर्ती के लिए आवेदन करने वाले लॉ ग्रेजुएट्स को एक साल की प्रैक्टिस वाला माना जाएगा। इस अवधि के लिए उन्हें अलग से प्रैक्टिस का प्रमाणपत्र देने की आवश्यकता नहीं होगी।

हालांकि, चयन होने के बाद उम्मीदवारों के लिए निर्धारित ट्रेनिंग और क्लर्कशिप की शर्त लागू रहेगी। यानी आवेदन के स्तर पर राहत मिलने के बावजूद न्यायिक सेवा में नियुक्ति से पहले उम्मीदवारों को आवश्यक व्यावहारिक प्रशिक्षण पूरा करना होगा।

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Arvind Maurya
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