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Supreme Court Lawyer बनना है? जानिए कितने साल का अनुभव चाहिए, AOR बनने तक का पूरा सफर

Supreme Court Lawyer: देश के हजारों कानून छात्र एक दिन सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने का सपना देखते हैं। हालांकि जिला अदालत या हाई कोर्ट की तुलना में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने का रास्ता काफी चुनौतीपूर्ण और लंबा माना जाता है। यहां केवल एलएलबी की डिग्री हासिल कर लेना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि वर्षों का अनुभव, पेशेवर प्रशिक्षण और विशेष परीक्षा भी पास करनी पड़ती है।

अगर आप भी जानना चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में वकील कैसे बनते हैं और इसके लिए कितने वर्षों की प्रैक्टिस जरूरी होती है, तो आइए पूरी प्रक्रिया को विस्तार से समझते हैं।

12वीं के बाद शुरू होती है वकालत की तैयारी

सुप्रीम कोर्ट में वकील बनने की यात्रा स्कूल शिक्षा पूरी करने के बाद शुरू होती है। 12वीं पास करने के बाद छात्र 5 वर्षीय इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स जैसे BA LLB, BBA LLB या BCom LLB में प्रवेश ले सकते हैं।

वहीं जो छात्र पहले किसी अन्य विषय में ग्रेजुएशन कर चुके हैं, वे 3 वर्षीय LLB कोर्स के जरिए कानून की पढ़ाई कर सकते हैं। देश के कई प्रतिष्ठित लॉ संस्थानों में प्रवेश के लिए CLAT जैसी प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं।

इंटर्नशिप से मिलती है कोर्ट की वास्तविक समझ

कानून की पढ़ाई के दौरान छात्रों को वरिष्ठ वकीलों, लॉ फर्मों या कानूनी संस्थानों के साथ इंटर्नशिप करने की सलाह दी जाती है।

इंटर्नशिप के दौरान कोर्ट की कार्यप्रणाली, कानूनी शोध, ड्राफ्टिंग, केस की तैयारी और मुकदमों की प्रक्रिया को नजदीक से समझने का अवसर मिलता है। यही अनुभव आगे चलकर सफल वकालत की मजबूत नींव तैयार करता है।

बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन के बाद मिलती है प्रैक्टिस की अनुमति

एलएलबी की पढ़ाई पूरी करने के बाद उम्मीदवार को किसी राज्य की बार काउंसिल में अपना पंजीकरण कराना होता है। Advocates Act, 1961 के तहत यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही व्यक्ति आधिकारिक रूप से वकालत शुरू कर सकता है।

इसके बाद वकील को ऑल इंडिया बार एग्जाम (AIBE) पास करना होता है। परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण करने पर Bar Council of India की ओर से प्रैक्टिस सर्टिफिकेट जारी किया जाता है, जिससे देशभर की अदालतों में वकालत करने की अनुमति मिलती है।

क्या सीधे सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस की जा सकती है?

कानूनी रूप से पंजीकृत अधिवक्ता अदालतों में प्रैक्टिस कर सकते हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में स्वतंत्र रूप से याचिका दाखिल करना अलग प्रक्रिया है।

अधिकांश युवा वकील अपने करियर की शुरुआत जिला अदालतों या हाई कोर्ट से करते हैं। इससे उन्हें मुकदमों की सुनवाई, बहस, साक्ष्यों की जांच और न्यायिक प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होता है।

कई वकील बाद में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ जूनियर के रूप में काम करते हैं ताकि वे शीर्ष अदालत की कार्यप्रणाली और प्रक्रियाओं को समझ सकें।

सुप्रीम कोर्ट में केस दाखिल करने के लिए क्या जरूरी है?

सुप्रीम कोर्ट में किसी मामले को स्वतंत्र रूप से दाखिल करने का अधिकार केवल एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (AOR) को प्राप्त होता है।

जो वकील AOR नहीं होते, वे सुप्रीम कोर्ट में बहस तो कर सकते हैं, लेकिन याचिका दाखिल करने के लिए उन्हें किसी AOR की सहायता लेनी पड़ती है।

AOR बनने के लिए कितने साल का अनुभव चाहिए?

एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड बनने के लिए वकील को कम से कम 4 वर्ष की नियमित कानूनी प्रैक्टिस पूरी करनी होती है।

इसके बाद उसे एक मान्यता प्राप्त AOR के अधीन कम से कम 1 वर्ष का प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होता है। यानी कुल मिलाकर AOR परीक्षा में बैठने से पहले लगभग 5 वर्षों का अनुभव और प्रशिक्षण आवश्यक माना जाता है।

AOR परीक्षा में क्या पूछा जाता है?

सुप्रीम कोर्ट द्वारा आयोजित एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड परीक्षा काफी महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण होती है।

इस परीक्षा में सुप्रीम कोर्ट के नियम, कानूनी ड्राफ्टिंग, प्रोफेशनल एथिक्स, प्रैक्टिस एंड प्रोसीजर तथा न्यायालय की कार्यप्रणाली से जुड़े विषय शामिल होते हैं।

परीक्षा पास करने के बाद वकील को AOR का दर्जा मिल जाता है और वह सुप्रीम कोर्ट में स्वतंत्र रूप से याचिकाएं दाखिल करने तथा मामलों की पैरवी करने का अधिकार प्राप्त कर लेता है।

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने में कितना समय लग सकता है?

यदि कोई छात्र 12वीं के बाद 5 वर्षीय लॉ कोर्स करता है, फिर बार काउंसिल में पंजीकरण और AIBE पास करता है, उसके बाद 4 वर्ष की प्रैक्टिस और 1 वर्ष की AOR ट्रेनिंग पूरी करता है, तो सुप्रीम कोर्ट में स्वतंत्र रूप से केस दाखिल करने का अधिकार हासिल करने में आमतौर पर 10 से 11 वर्ष का समय लग सकता है।

यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट में सफल वकालत के लिए केवल डिग्री नहीं, बल्कि धैर्य, अनुभव और कानूनी विशेषज्ञता भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

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