Lays Chips Case: कभी-कभी महज 5 रुपये की खरीदारी भी बड़ी कानूनी लड़ाई का कारण बन जाती है। ऐसा ही एक मामला राजस्थान के जयपुर से सामने आया है, जहां Lay’s चिप्स के एक छोटे पैकेट को लेकर शिकायत जिला उपभोक्ता आयोग तक पहुंच गई। ग्राहक का आरोप था कि पैकेट पर 15 ग्राम चिप्स होने की जानकारी दी गई थी, लेकिन उसे खोलने पर अंदर केवल 4 ग्राम चिप्स मिले। मामले की सुनवाई के बाद उपभोक्ता आयोग ने चिप्स बनाने वाली कंपनी PepsiCo को ग्राहक को मुआवजा देने का आदेश दिया है।
PepsiCo को एक महीने में देने होंगे ₹8,000
इस मामले में जयपुर के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग-II ने 17 सितंबर 2026 को फैसला सुनाया। आयोग ने PepsiCo India Holdings को जिम्मेदार ठहराते हुए ग्राहक को मानसिक उत्पीड़न के लिए 5,000 रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में 3,000 रुपये देने का निर्देश दिया। इसके अलावा, चिप्स खरीदने के लिए चुकाए गए 5 रुपये भी 6 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ लौटाने होंगे। यह ब्याज 6 अप्रैल 2022 से वास्तविक भुगतान होने तक लागू रहेगा।
आयोग के आदेश के अनुसार, कंपनी को मुआवजे और कानूनी खर्च की राशि एक महीने के भीतर चुकानी होगी। निर्धारित समय में भुगतान नहीं करने पर इस रकम पर भी आदेश की तारीख से 6 प्रतिशत सालाना ब्याज देना पड़ेगा।
ग्राहक की शिकायत पर Metro Cash & Carry ने क्या कहा?
यह मामला जयपुर के चंद्रमण जालान से जुड़ा है, जो जालान बिल्डिंग एंड हार्डवेयर स्टोर के मालिक हैं। उन्होंने 10 नवंबर 2020 को Metro Cash & Carry से घर आए मेहमानों के लिए कई खाद्य सामग्री खरीदी थी। इसी खरीदारी में 5 रुपये का Lay’s चिप्स का पैकेट भी शामिल था।
चंद्रमण जालान के मुताबिक, जब उन्होंने मेहमानों को परोसने के लिए पैकेट खोला, तो उसमें चिप्स की मात्रा सामान्य से काफी कम लगी। इसके बाद उन्होंने चिप्स का वजन किया, जिसमें कथित तौर पर केवल 4 ग्राम चिप्स मिले, जबकि पैकेट पर 15 ग्राम वजन दर्ज था।
ग्राहक ने इस संबंध में सामान बेचने वाली कंपनी Metro Cash & Carry से शिकायत की, लेकिन वह जवाब से संतुष्ट नहीं हुए। इसके बाद उन्होंने 6 अप्रैल 2022 को जयपुर के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग-II में शिकायत दर्ज कराई। इसमें अनुचित व्यापार व्यवहार और सेवा में कमी का आरोप लगाया गया।
दूसरी ओर, Metro Cash & Carry ने अपने बचाव में कहा कि उत्पाद के वजन में कमी निर्माण के दौरान हुई हो सकती है। कंपनी के अनुसार, ऐसी स्थिति में जिम्मेदारी निर्माता कंपनी की होनी चाहिए।
सुनवाई में पेश नहीं हुई PepsiCo, आयोग ने की एकतरफा कार्रवाई
मामले में PepsiCo को नोटिस भेजा गया था, लेकिन कंपनी सुनवाई के दौरान आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुई। इसके बाद आयोग ने कंपनी के खिलाफ एकतरफा कार्यवाही की और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर अपना फैसला सुनाया। वहीं, Metro Cash & Carry के खिलाफ दर्ज शिकायत को खारिज कर दिया गया।
यह मामला उपभोक्ताओं के लिए एक अहम संदेश देता है कि यदि किसी उत्पाद पर दर्ज मात्रा और वास्तव में मिलने वाली मात्रा में अंतर हो, तो ग्राहक उपभोक्ता आयोग में शिकायत कर सकते हैं। हालांकि, इस मामले में आयोग का आदेश संबंधित शिकायत और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर दिया गया है।

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