उत्तर प्रदेश में मैरिज रजिस्ट्रेशन के नियमों में बदलाव किया गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले के बाद राज्य में विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। अब शादी का रजिस्ट्रेशन कराने के दौरान वर और वधू के रक्त संबंधी परिजनों की मौजूदगी जरूरी होगी। इसके साथ ही उम्र की पुष्टि के लिए केवल आधार कार्ड को मान्य नहीं माना जाएगा। आवेदकों को जन्मतिथि प्रमाणित करने के लिए निर्धारित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।
Marriage Registration: अब इन परिजनों की मौजूदगी जरूरी
उत्तर प्रदेश में नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, विवाह पंजीकरण के समय दूल्हा और दुल्हन के रक्त संबंधी परिजनों की उपस्थिति आवश्यक होगी। इनमें माता-पिता, भाई-बहन, दादा-दादी, नाना-नानी या बालिग बेटे-बेटी शामिल हो सकते हैं।
इन नियमों का उद्देश्य विवाह पंजीकरण के दौरान संबंधित व्यक्तियों की पहचान और विवरण का सत्यापन सुनिश्चित करना है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद आईजी स्टांप की ओर से ये निर्देश जारी किए गए हैं।
UP Marriage Rules: उम्र साबित करने के लिए आधार कार्ड पर्याप्त नहीं
नए निर्देशों में उम्र के सत्यापन को लेकर भी बदलाव किया गया है। अब मैरिज रजिस्ट्रेशन के लिए केवल आधार कार्ड के आधार पर वर-वधू की उम्र निर्धारित नहीं की जाएगी। इसके बजाय जन्म प्रमाणपत्र, हाईस्कूल प्रमाणपत्र और अन्य निर्धारित दस्तावेजों के जरिए जन्मतिथि की पुष्टि की जाएगी।
आधार कार्ड का इस्तेमाल पहचान और पते के प्रमाण के रूप में किया जा सकेगा, लेकिन इसे जन्मतिथि या उम्र का प्रमाण नहीं माना जाएगा। इसलिए विवाह पंजीकरण कराने वाले लोगों को उम्र से संबंधित मान्य दस्तावेज तैयार रखने होंगे।
शादी के दिन दूल्हे की उम्र 21 और दुल्हन की 18 साल होना जरूरी
प्रमुख सचिव स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन अमित गुप्ता ने इस संबंध में मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी करते हुए विस्तृत दिशा-निर्देश भेजे हैं। इसमें विवाह पंजीकरण के दौरान निर्धारित नियमों और सावधानियों का पालन करने पर जोर दिया गया है।
निर्देशों के मुताबिक, विवाह होने की तारीख तक वर की उम्र कम से कम 21 वर्ष और वधू की उम्र कम से कम 18 वर्ष पूरी होनी चाहिए। निर्धारित उम्र पूरी नहीं होने पर विवाह का पंजीकरण नहीं किया जाएगा।
अधिकारी खुद करेंगे जन्मतिथि का सत्यापन
नए नियमों के तहत विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया में संबंधित अधिकारी को वर और वधू की जन्मतिथि का सत्यापन स्वयं करना होगा। यह जिम्मेदारी किसी कर्मचारी को नहीं सौंपी जाएगी।
इस बदलाव के बाद आवेदकों के दस्तावेजों की जांच और उम्र की पुष्टि की प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश में मैरिज रजिस्ट्रेशन कराने वाले लोगों को अब परिजनों की मौजूदगी और उम्र से जुड़े मान्य दस्तावेजों की व्यवस्था पहले से करनी होगी।
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