यूपीआई को लेकर एक बार फिर चार्ज वसूलने की चर्चा तेज हो गई है। कुछ दिन पहले ऐसी खबरें सामने आई थीं कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम UPI पर जल्द ही शुल्क लगाया जा सकता है। हालांकि, सरकार ने इन खबरों को निराधार बताते हुए साफ किया था कि यूपीआई ट्रांजैक्शन पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगाया जाएगा। अब नीति आयोग के वाइस चेयरमैन अशोक लहिरी के बयान ने इस पूरे मामले को फिर चर्चा में ला दिया है।
मुंबई में चल रहे ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 (GFF 2026) के दौरान अशोक लहिरी ने UPI के भविष्य में चार्जेबल होने की संभावना पर बात की। उन्होंने कहा कि UPI हमेशा के लिए मुफ्त नहीं रह सकता और इसके संचालन से जुड़ी लागत को देखते हुए भविष्य में शुल्क लगाने पर विचार किया जा सकता है।
UPI चार्ज पर क्या बोले अशोक लहिरी?
ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में पहुंचे नीति आयोग के वाइस चेयरमैन अशोक लहिरी ने मनी कंट्रोल से बातचीत के दौरान UPI चार्ज को लेकर अपनी राय रखी। उनसे जब पूछा गया कि मर्चेंट पेमेंट के लिए UPI चार्ज कितनी जल्दी लागू किया जा सकता है, तो उन्होंने किसी निश्चित तारीख की जानकारी देने से इनकार किया।
उन्होंने कहा, ‘मैं आपको कोई पक्की समय-सीमा तो नहीं बता सकता, लेकिन जितनी जल्दी ये हो जाए, उतना ही अच्छा है क्योंकि इसमें लागत आती है. कई बार हम चाहते हैं कि चीजें मुफ्त मिलें, लेकिन ये लंबे समय तक नहीं चल सकता क्योंकि इसमें ऑपरेटिंग और सेटअप की लागतें शामिल होती हैं. मेरा मानना है कि फिनटेक कंपनियों का एक टिकाऊ फाइनेंशियल मॉडल होना चाहिए. वो लोगों से बिजनेस या बिजनेस से बिजनेस के लिए चार्ज करेंगी या नहीं, लोगों के बीच लेन-देन मुफ्त होगा या नहीं, या कोई मिनिमम लिमिट होगी या नहीं – ये सभी बातें एक्सपर्ट्स तय करेंगे. लेकिन मेरा मानना है कि UPI को खुद अपना खर्च उठाने में सक्षम होना चाहिए.’
लहिरी के इस बयान से संकेत मिलता है कि भविष्य में UPI के लिए ऐसा मॉडल तैयार किया जा सकता है, जिसमें इसके संचालन और इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत को किसी न किसी तरीके से पूरा किया जाए। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि शुल्क किस तरह और किन ट्रांजैक्शन पर लागू किया जाएगा।
चार्ज लगा तो क्या UPI का इस्तेमाल कम होगा?
इंटरव्यू के दौरान अशोक लहिरी से यह भी पूछा गया कि अगर UPI पर शुल्क लगाया जाता है तो क्या इससे इसका इस्तेमाल कम हो सकता है। इस पर उन्होंने कहा, ‘अगर चार्ज लगते भी हैं, तो वो कुछ बेसिस पॉइंट्स ही होंगे, एक परसेंट भी नहीं. मुझे लगता है कि भारतीय आबादी का एक बड़ा हिस्सा ऐसा है जो हर 100 रुपये के ट्रांजैक्शन पर लगने वाले कुछ पैसों की जगह सर्विस की क्वालिटी को ज्यादा अहमियत देता है. ज्यादातर चीजें सर्विस की क्वालिटी, भरोसे और मजबूती पर निर्भर करेंगी.
इसका मतलब यह है कि अगर भविष्य में शुल्क लगाया जाता है तो लहिरी के मुताबिक इसकी दर बहुत मामूली हो सकती है। उनका मानना है कि यूजर्स के लिए पेमेंट सर्विस की गुणवत्ता, भरोसा और सिस्टम की मजबूती भी महत्वपूर्ण होगी।
MDR को लेकर अभी साफ नहीं हुई तस्वीर
अशोक लहिरी ने अपने बयान में यह स्पष्ट नहीं किया कि Merchant Discount Rate (MDR) कब से लागू होगा। ऐसे में फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि UPI पर चार्ज कब से और किस तरह वसूला जाएगा।
हालांकि, उनका बयान ऐसे समय आया है जब सरकार ने हाल ही में कानून में बदलाव किया है। इस बदलाव के तहत UPI ट्रांजैक्शन पर सभी के लिए Zero-MDR की अनिवार्यता को हटा दिया गया है। इसका उद्देश्य चुनिंदा ज्यादा कीमत वाले डिजिटल ट्रांजैक्शन पर मामूली शुल्क लगाए जाने की संभावना को जगह देना है।
फिलहाल आम यूजर्स के लिए UPI पेमेंट पर कोई नया चार्ज लागू होने की घोषणा नहीं हुई है। लेकिन नीति आयोग के वाइस चेयरमैन का बयान यह संकेत जरूर देता है कि भविष्य में UPI के फ्री मॉडल को लेकर नए विकल्पों पर चर्चा जारी रह सकती है।
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