देश में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (Ethanol Blended Petrol) को लेकर लंबे समय से चर्चा जारी है। जहां एक ओर सरकार इसे स्वच्छ ऊर्जा और तेल आयात कम करने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर इसके असर को लेकर कई तरह की आशंकाएं भी सामने आ रही हैं। इसी बीच केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने E20, E25 और E85 फ्यूल को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट किया है।
E20 पेट्रोल को लेकर अफवाहों पर सरकार का जवाब
हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने E20 पेट्रोल को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) से इंजन खराब होने जैसी बातें पूरी तरह गलत हैं।
उन्होंने कहा, “E20 पेट्रोल से इंजन खराब होने की खबरें गलत हैं. ये योजना पर्यावरण को बेहतर बनाने और भारत की तेल आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए शुरू की गई है”.
मंत्री ने कहा कि सरकार वैज्ञानिक आधार पर इस योजना को आगे बढ़ा रही है और लोगों को अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए।
सरकार ला रही है E85 Fuel, 20 रुपये तक सस्ता हो सकता है पेट्रोल
हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि सरकार अब E85 फ्यूल लाने की तैयारी कर रही है। इस ईंधन में 85 प्रतिशत तक एथेनॉल का मिश्रण होगा।
उन्होंने कहा, “सरकार E85 पेट्रोल लाने की तैयारी कर रही है. इसमें 85% तक एथेनॉल होगा और इसकी कीमत E20 पेट्रोल से करीब 20 रुपये प्रति लीटर कम हो सकती है. हालांकि इसका इस्तेमाल केवल फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल (FFV) में ही किया जा सकेगा.”
यानी E85 फ्यूल सभी वाहनों के लिए नहीं होगा। इसका उपयोग केवल उन वाहनों में किया जा सकेगा जो फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक के अनुरूप तैयार किए गए हैं।
E25 पेट्रोल पर अभी जारी है परीक्षण
केंद्रीय मंत्री ने E25 पेट्रोल को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि फिलहाल E25 केवल परीक्षण (Testing) के चरण में है और इसे लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
सरकार का कहना है कि सभी वैज्ञानिक परीक्षण पूरे होने के बाद ही इस ईंधन को लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
एथेनॉल और EV दोनों पर रहेगा सरकार का फोकस
हरदीप सिंह पुरी ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार केवल एथेनॉल आधारित ईंधन पर ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने पर भी समान रूप से काम कर रही है।
उनके अनुसार, आने वाले समय में भारत में एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी दोनों को समानांतर रूप से आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिले और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हो सके।
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