Cyber Fraud Alert: स्मार्टफोन यूजर्स के लिए हाल ही में एक गंभीर साइबर सुरक्षा खामी का खुलासा हुआ है, जिसने टेक्स्ट मैसेज की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर लोग मानते हैं कि फोन पर जिस व्यक्ति का नाम दिखाई देता है, संदेश उसी ने भेजा होगा, लेकिन शोधकर्ताओं ने ऐसी कमजोरी का पता लगाया जिससे साइबर अपराधी किसी भी भरोसेमंद व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल कर नकली मैसेज भेज सकते थे।
यह खामी Android और iPhone दोनों प्लेटफॉर्म को प्रभावित कर रही थी। हालांकि, राहत की बात यह है कि शोधकर्ताओं द्वारा जानकारी दिए जाने के बाद मोबाइल नेटवर्क कंपनियों और टेक कंपनियों ने इसे ठीक करने के लिए सुरक्षा अपडेट जारी कर दिए हैं।
कैसे सामने आई यह सुरक्षा खामी?
इस कमजोरी का पता कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सैन डिएगो के कंप्यूटर वैज्ञानिकों ने लगाया। जांच में पता चला कि समस्या एक पुराने फीचर से जुड़ी थी, जिसे Email-to-Text Service कहा जाता है।
इस सेवा की मदद से किसी ईमेल को सीधे SMS में बदलकर मोबाइल नंबर पर भेजा जा सकता है। यह सुविधा वर्षों से कई मोबाइल नेटवर्क में मौजूद रही है, लेकिन इसी प्रक्रिया में एक तकनीकी कमजोरी छिपी हुई थी।
ईमेल और SMS के बीच ट्रांसलेशन बना खतरे की वजह
ईमेल और टेक्स्ट मैसेजिंग अलग-अलग तकनीकों पर आधारित होते हैं। जब किसी ईमेल को SMS में बदला जाता है, तो नेटवर्क ऑपरेटरों को कई तकनीकी जानकारियों को परिवर्तित करना पड़ता है।
यहीं पर साइबर अपराधियों को मौका मिल जाता था। वे ईमेल की पहचान संबंधी जानकारी में हेरफेर करके अपनी असली पहचान छिपा सकते थे और संदेश को किसी अन्य व्यक्ति के नाम से प्रदर्शित करा सकते थे।
आपके कॉन्टैक्ट्स की पहचान का भी हो सकता था गलत इस्तेमाल
शोधकर्ताओं के अनुसार, हमलावर विशेष अक्षरों और संशोधित ईमेल एड्रेस का उपयोग करके स्मार्टफोन की मैसेजिंग ऐप को भ्रमित कर सकते थे। इसके बाद फोन यह समझ लेता था कि संदेश किसी सेव किए गए कॉन्टैक्ट से आया है।
ऐसी स्थिति में स्क्रीन पर किसी दोस्त, रिश्तेदार, सहकर्मी या परिचित का नाम दिखाई देता था, जबकि वास्तविकता में संदेश किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा भेजा गया होता था।
पुरानी चैट में भी दिखाई दे सकते थे फर्जी मैसेज
इस खामी का सबसे खतरनाक पहलू यह था कि कुछ मामलों में नकली संदेशों को पहले से चल रही चैट थ्रेड में भी जोड़ा जा सकता था।
ऐसे में यूजर को यह महसूस होता था कि संदेश उसी व्यक्ति ने भेजा है जिससे वह पहले से बातचीत कर रहा है। इससे धोखाधड़ी वाले लिंक, फर्जी भुगतान अनुरोध या अन्य साइबर हमले ज्यादा विश्वसनीय लग सकते थे और लोगों के झांसे में आने की आशंका बढ़ जाती थी।
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हालांकि शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि हमलावर यूजर के जवाब नहीं पढ़ सकते थे, लेकिन किसी भरोसेमंद व्यक्ति की पहचान का भ्रम पैदा करना अपने आप में बड़ा साइबर खतरा था।
कंपनियों ने जारी किए सुरक्षा अपडेट
इस शोध के सार्वजनिक होने के बाद कई मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटरों और स्मार्टफोन कंपनियों ने अपने सिस्टम में बदलाव किए हैं। अब संदेश भेजने वाले की पहचान को अधिक सुरक्षित तरीके से सत्यापित किया जा रहा है।
इसके अलावा Android और iPhone की मैसेजिंग सेवाओं में भी जरूरी सुधार किए गए हैं ताकि भविष्य में Message Spoofing जैसी घटनाओं को रोका जा सके और यूजर्स को बेहतर सुरक्षा मिल सके।
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यूजर्स क्या सावधानी बरतें?
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी मैसेज में आए लिंक, OTP, बैंकिंग जानकारी या पैसों की मांग पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए, भले ही संदेश किसी परिचित के नाम से दिखाई दे रहा हो।
यदि कोई असामान्य या संदिग्ध संदेश मिले तो संबंधित व्यक्ति से सीधे कॉल या किसी अन्य माध्यम से पुष्टि करना बेहतर होता है। साथ ही फोन और मैसेजिंग ऐप्स को हमेशा नवीनतम सुरक्षा अपडेट के साथ अपडेट रखना चाहिए।
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