Gold News India: भारत में सोने की खरीद सिर्फ शौक या शादी-ब्याह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भंडार पर भी बड़ा असर डालती है। हाल ही में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने लोगों से एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील की है। इसके पीछे मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने की चिंता बताई जा रही है।
भारत में हर साल कितने टन सोने की होती है खपत?
रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है। देश में हर साल करीब 700 से 800 टन सोने की खपत होती है। घरेलू उत्पादन बेहद कम होने के कारण लगभग 90 प्रतिशत सोना विदेशों से आयात किया जाता है।
हालांकि साल 2026 में सोने की मांग में लगातार गिरावट देखने को मिली है। जनवरी में जहां करीब 100 टन की मांग थी, वहीं फरवरी में यह घटकर 65 से 66 टन रह गई। मार्च में यह आंकड़ा 20 से 22 टन तक पहुंच गया, जबकि अप्रैल में सोने का आयात सिर्फ 15 टन दर्ज किया गया। बताया जा रहा है कि कई वर्षों में पहली बार मासिक आयात इतना कम हुआ है।
भारत हर साल कितने लाख करोड़ का खरीदता है सोना?
भारत में हर साल करीब सात लाख करोड़ रुपये का सोना खरीदा जाता है। इसकी भुगतान राशि डॉलर में चुकानी पड़ती है। ऐसे में जब सोने की खरीद बढ़ती है तो डॉलर की मांग भी तेज हो जाती है। डॉलर महंगा होने का सीधा असर रुपये पर पड़ता है और भारतीय मुद्रा कमजोर होने लगती है।
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रुपये में गिरावट आने से कच्चे तेल और सोने जैसी आयातित वस्तुएं और महंगी हो जाती हैं। फिलहाल डॉलर का भाव 95 रुपये के पार पहुंच चुका है, जिससे आयात का दबाव और बढ़ गया है।
शादी और त्योहारों में सबसे ज्यादा बढ़ती है डिमांड
भारत में सोने की सबसे ज्यादा खरीद शादी के सीजन में होती है। इस दौरान लोग बड़ी मात्रा में ज्वेलरी खरीदते हैं। इसके अलावा दिवाली, धनतेरस और अन्य त्योहारों पर भी सोने की मांग बढ़ जाती है।
सिर्फ आभूषण ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में लोग निवेश के तौर पर भी सोना खरीदते हैं। यही वजह है कि भारतीय बाजार में गोल्ड की मांग हमेशा मजबूत बनी रहती है।
इस बार क्यों घटी सोने की मांग?
उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार मांग में कमी के पीछे कई कारण हैं। इनमें सप्लाई में बाधा, बैंकों से अनुमति मिलने में देरी, कस्टम क्लियरेंस की समस्याएं और टैक्स से जुड़ी अनिश्चितताएं शामिल हैं।
इसके अलावा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे सोने के दामों ने भी ग्राहकों की खरीदारी को प्रभावित किया है।
पिछले वर्षों में कैसी रही गोल्ड डिमांड?
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के आंकड़ों के अनुसार, साल 2024 में भारत में कुल सोने की मांग करीब 802.8 टन रही थी। वहीं 2025 में सोने की रिकॉर्ड ऊंची कीमतों के चलते मांग में गिरावट दर्ज की गई और यह घटकर लगभग 710.9 टन रह गई।
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