Ethanol Subsidy India: केंद्र सरकार ने देश में एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने एथेनॉल बनाने वाली परियोजनाओं के लिए 4,687 करोड़ रुपये की ब्याज सब्सिडी को मंजूरी दी है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने सोमवार को राज्यसभा में यह जानकारी दी। सरकार का मानना है कि इस कदम से देश में एथेनॉल उत्पादन बढ़ाने, जैव ईंधन को बढ़ावा देने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
Ethanol Subsidy से किन परियोजनाओं को मिलेगा फायदा?
सरकार के मुताबिक, पात्र एथेनॉल परियोजनाओं को अधिकतम पांच साल तक हर साल 6 फीसदी ब्याज सब्सिडी दी जाएगी। हालांकि, यदि बैंक की ब्याज दर 6 फीसदी से कम है तो बैंक द्वारा वसूले गए ब्याज का 50 फीसदी सब्सिडी के रूप में दिया जाएगा। इन दोनों गणनाओं में जो राशि कम होगी, उतनी ही ब्याज सब्सिडी परियोजना को मिलेगी।
यह सुविधा नई डिस्टिलरी स्थापित करने या मौजूदा इकाइयों में एथेनॉल उत्पादन शुरू करने के लिए लिए गए टर्म लोन पर लागू होगी। योजना के तहत लोन पर एक साल की शुरुआती छूट की सुविधा भी शामिल है।
इस योजना के दायरे में शीरे, अनाज या दोनों तरह के कच्चे माल से एथेनॉल तैयार करने वाली डिस्टिलरी को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य एथेनॉल उत्पादन क्षमता को बढ़ाना और पेट्रोल में इसके मिश्रण की नीति को और मजबूत करना है।
सरकार ने NABARD को जारी किए ₹2,075 करोड़
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि सरकार वित्त वर्ष 2022-23 से अब तक नाबार्ड (NABARD) को 2,075 करोड़ रुपये जारी कर चुकी है। नाबार्ड इस ब्याज सब्सिडी योजना के तहत राशि उपलब्ध कराने वाली प्रमुख एजेंसी है।
सरकार के इस कदम का व्यापक उद्देश्य देश में जैव ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ाना है। एथेनॉल को पेट्रोल में मिलाने से कच्चे तेल के आयात में कमी लाने और देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
2G Ethanol और चीनी मिलों को भी मिल रही मदद
सरकार की पीएम जी-वन योजना के तहत कृषि अवशेष और बायोमास से सेकेंड जेनरेशन यानी 2G एथेनॉल बनाने वाली परियोजनाओं को वित्तीय सहायता दी जाती है। इसके अलावा चीनी मिलों को भी विभिन्न प्रकार के कच्चे माल से एथेनॉल बनाने वाली इकाइयों में बदलाव के लिए ब्याज संबंधी सहायता दी जा रही है।
एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल पहल के तहत एथेनॉल पर 5 फीसदी GST लागू है। इसके साथ ही सरकारी तेल कंपनियां एथेनॉल उत्पादकों के साथ लंबे समय के खरीद समझौते भी करती हैं। इससे एथेनॉल उत्पादकों को बाजार और बिक्री को लेकर अपेक्षाकृत स्थिरता मिलती है।
Mangaluru में बनेगा 17.5 लाख टन का Strategic Oil Reserve
राज्यसभा में जानकारी देते हुए सुरेश गोपी ने मंगलुरु में बन रहे रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ओएनजीसी की ओर से मंगलुरु में तैयार किए जा रहे 17.5 लाख टन क्षमता वाले पेट्रोलियम भंडार की आधी क्षमता रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार के तौर पर रखी जाएगी।
बाकी क्षमता का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जाएगा। सरकार के अनुसार, देश में मौजूदा कुल तेल भंडारण क्षमता करीब 74 दिनों की शुद्ध कच्चे तेल की आयात जरूरत के बराबर है।
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