Mobile Tower: क्या आपके घर के पास लगे मोबाइल टावर से निकलने वाली तरंगें आपको बीमार कर रही हैं? क्या इससे कैंसर हो सकता है? अगर आपके मन में भी ये सवाल हैं, तो भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) ने इनका जवाब देते हुए सारी आशंकाओं को खारिज कर दिया है। सरकार ने साफ कहा है कि मोबाइल टावर रेडिएशन से कैंसर होने का डर पूरी तरह बेबुनियाद है।
सरकार और WHO का क्या कहना है?
दूरसंचार विभाग ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट का हवाला दिया है:
- 25,000 स्टडीज का निचोड़: WHO ने दुनिया भर में हुई लगभग 25 हजार रिसर्च और लेखों की समीक्षा की है।
- निष्कर्ष: बेस स्टेशन और वायरलेस नेटवर्क से निकलने वाली कमजोर रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) तरंगों से स्वास्थ्य को नुकसान या कैंसर होने का कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है।
- 5G भी सुरक्षित: WHO ने यह भी स्पष्ट किया है कि 5G वायरलेस तकनीक से भी किसी गंभीर बीमारी का खतरा साबित नहीं हुआ है।
भारत के नियम दुनिया से 10 गुना ज्यादा सख्त
अगर आपको लगता है कि भारत में नियम ढीले हैं, तो यह आंकड़ा आपको चौंका देगा:
- 10 गुना कड़े मानक: भारत में मोबाइल टावरों के लिए विकिरण (Radiation) के मानक अंतरराष्ट्रीय एजेंसी (ICNIRP) द्वारा तय सीमाओं से 10 गुना ज्यादा सख्त हैं।
- सुरक्षित सीमा: भारत में रेडिएशन की सीमा WHO द्वारा सुझाई गई सीमा का सिर्फ दसवां हिस्सा है।
- भारी जुर्माना: अगर कोई टावर तय मानकों से ज्यादा रेडिएशन छोड़ता है, तो टेलीकॉम कंपनी पर भारी जुर्माना लगता है और टावर बंद भी किया जा सकता है।
EMF एक प्राकृतिक प्रक्रिया है
सरकार ने समझाया है कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड (EMF) कोई नई चीज नहीं है। यह सूरज, धरती और आयनमंडल के जरिए प्राकृतिक रूप से हमारे आसपास हमेशा मौजूद रहता है। मोबाइल टावर और फोन बहुत कम शक्ति (Low Power) पर काम करते हैं, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है।
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