E-Skin Technology: क्या रोबोट कभी दर्द महसूस कर सकते हैं? हांगकांग के वैज्ञानिकों ने इस दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ हांगकांग की टीम ने एक ऐसी ‘इलेक्ट्रॉनिक स्किन’ विकसित की है, जो न केवल छूने (Touch) का एहसास कर सकती है, बल्कि चोट या तेज दबाव पड़ने पर इंसानों की तरह ‘दर्द’ महसूस कर तुरंत प्रतिक्रिया भी दे सकती है।
क्या है E-Skin तकनीक?
यह एक न्यूरोमॉर्फिक रोबोटिक स्किन है, जिसे इंजीनियर युयू गाओ और उनकी टीम ने बनाया है।
- मकसद: इसका मुख्य उद्देश्य ह्यूमनॉइड रोबोट्स को ज्यादा संवेदनशील और सुरक्षित बनाना है।
- सिद्धांत: यह तकनीक बिल्कुल इंसानी नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) की तरह काम करती है। यह साधारण स्पर्श और नुकसानदेह दबाव के बीच का अंतर समझ सकती है।
कैसे काम करता है यह सिस्टम? (Touch vs Pain)
यह स्किन दबाव को इलेक्ट्रिकल सिग्नल्स में बदलती है। इसके काम करने का तरीका दो भागों में बंटा है:
- हल्का स्पर्श (Light Touch): जब रोबोट किसी चीज को हल्के से छूता है, तो सिग्नल सेंट्रल प्रोसेसर (रोबोट के दिमाग) तक जाता है। इसका इस्तेमाल चीजों को पकड़ने या हाथ मिलाने के लिए होता है।
- दर्द का एहसास (Pain Threshold): जैसे ही दबाव एक तय सीमा (दर्द की सीमा) से ज्यादा होता है, यह सिस्टम मेन प्रोसेसर को बाईपास कर देता है और सिग्नल सीधे मोटर्स को भेजता है।
- नतीजा: रोबोट तुरंत पीछे हट जाता है (Reflex Action), ठीक वैसे ही जैसे गर्म तवे पर हाथ लगते ही हम झटके से हाथ खींच लेते हैं। इससे रोबोट खुद को और इंसानों को चोट लगने से बचा सकता है।
खुद की मरम्मत और निगरानी (Self Diagnosis)
इस स्किन की दो और बड़ी खूबियां हैं:
- डैमेज डिटेक्शन: स्किन के सेंसर लगातार सिग्नल भेजते रहते हैं। अगर कहीं कट लगता है या स्किन फटती है, तो सिग्नल रुक जाता है और रोबोट को तुरंत पता चल जाता है कि चोट कहाँ लगी है।
- आसान रिपेयर: यह पूरी स्किन मैग्नेटिक मॉड्यूल्स (चुंबकीय टुकड़ों) से बनी है। अगर कोई हिस्सा खराब हो जाए, तो पूरा रोबोट खोलने की जरूरत नहीं है; बस उस छोटे हिस्से को निकालकर नया लगा दिया जाता है।
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