Sunday, February 1, 2026
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BMC Parshad Salary: एशिया की सबसे अमीर महानगर पालिका BMC में जीतने वाले पार्षदों की कितनी है सैलरी, जानिए क्या-क्या मिलती हैं सुविधाएं

BMC Parshad Salary: महाराष्ट्र निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की बंपर जीत के बाद देश की सबसे अमीर और एशिया की सबसे बड़ी महानगर पालिका यानी बीएमसी (BMC) एक बार फिर सुर्खियों में है। मुंबई जैसे विशाल महानगर की बुनियादी सुविधाओं—पानी, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा—का जिम्मा इन्हीं पार्षदों पर होता है। चुनाव नतीजों के बाद आम लोगों के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर जनता की सेवा करने वाले इन पार्षदों को सरकार की तरफ से कितनी सैलरी और सुविधाएं मिलती हैं। आइए जानते हैं बीएमसी पार्षदों की कमाई का पूरा गणित।

10 हजार से बढ़कर 25 हजार हुआ मानदेय

बीएमसी पार्षदों को मिलने वाली राशि को सैलरी के बजाय मानदेय (Honorarium) कहा जाता है। साल 2017 से पहले पार्षदों को महज 10,000 रुपये प्रति माह मिलते थे, जो मुंबई जैसे महंगे शहर में उनकी जिम्मेदारियों और भागदौड़ के हिसाब से काफी कम था। पार्षदों को रोज जनता के बीच रहना पड़ता है और कई बार अपनी जेब से भी खर्च करना पड़ता है। बढ़ती महंगाई और काम के बोझ को देखते हुए जुलाई 2017 में एक अहम फैसला लिया गया, जिसके तहत पार्षदों का मासिक मानदेय बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया गया।

बैठकों में उपस्थिति से बढ़ती है कमाई

पार्षदों की आय केवल फिक्स मानदेय तक सीमित नहीं होती। उनकी महीने की कुल कमाई इस बात पर निर्भर करती है कि वे निगम के कामकाज में कितने सक्रिय हैं। बीएमसी में होने वाली आम सभा, स्थायी समिति और अन्य वैधानिक समितियों की बैठकों में शामिल होने पर पार्षदों को अतिरिक्त भत्ता मिलता है। आसान शब्दों में कहें तो, जो पार्षद नियमित रूप से बैठकों में हिस्सा लेते हैं, उनकी महीने की कुल आय उन पार्षदों से ज्यादा होती है जो बैठकों से नदारद रहते हैं। इसलिए हर पार्षद के हाथ में आने वाली रकम अलग-अलग हो सकती है।

वार्ड के विकास के लिए मिलता है फंड

निजी मानदेय के अलावा, पार्षदों को अपने क्षेत्र को चमकाने के लिए कई अधिकार और सुविधाएं दी जाती हैं। सबसे महत्वपूर्ण है ‘वार्ड डेवलपमेंट फंड’। यह पैसा पार्षदों को अपने वार्ड में सड़क निर्माण, नालियों की सफाई, स्ट्रीट लाइट लगवाने, पार्क के रखरखाव और शौचालय निर्माण जैसे कार्यों के लिए दिया जाता है। फंड की यह राशि वार्ड के क्षेत्रफल और वहां की आबादी की जरूरतों के हिसाब से तय होती है। इसके अलावा, पार्षदों को निगम मुख्यालय आने-जाने और क्षेत्र के दौरे के लिए यात्रा भत्ता (Travel Allowance) और मीटिंग अलाउंस भी दिया जाता है।

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