Union Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026 पेश कर दिया गया है. अगर इस बजट को एक लाइन में समझा जाए, तो सरकार ने आज की राहत के बजाय कल के विकास पर दांव खेला है. वित्त मंत्री ने अपना पूरा जोर पूंजीगत खर्च (Capex), इंफ्रास्ट्रक्चर और हेल्थकेयर पर लगाया है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि सरकार बड़े प्रोजेक्ट्स के जरिए ही देश की ग्रोथ को आगे बढ़ाना चाहती है. लेकिन इस ‘भविष्य की प्लानिंग’ के बीच आम आदमी की ‘आज की जरूरतें’ कहीं पीछे छूट गई हैं.
भविष्य के लिए बड़े ऐलान और मेडिकल सेक्टर को बूस्ट
अर्थव्यवस्था के लिहाज से देखें तो बजट में कई सकारात्मक कदम उठाए गए हैं. सरकार ने हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और टियर-2 व टियर-3 शहरों में भारी निवेश का रोडमैप तैयार किया है. स्वास्थ्य क्षेत्र में आयुर्वेदिक एम्स (Ayurvedic AIIMS) और नए मेडिकल हब बनाने की घोषणाएं मेडिकल टूरिज्म को नई ऊंचाई पर ले जा सकती हैं. इसके अलावा, आम जनता को थोड़ी राहत देते हुए कैंसर और दुर्लभ बीमारियों की दवाओं को ड्यूटी फ्री (Duty Free) कर दिया गया है. करदाताओं के लिए रिवाइज्ड इनकम टैक्स रिटर्न (Revised ITR) दाखिल करने की समय-सीमा बढ़ाना भी एक व्यावहारिक फैसला है.
मिडिल क्लास और युवाओं के हाथ लगी सिर्फ निराशा
इस बजट से सबसे ज्यादा उम्मीदें सैलरीड मिडिल क्लास और देश के युवाओं को थीं, लेकिन इनके हाथ सिर्फ मायूसी लगी है. महंगाई के इस दौर में मध्यम वर्ग को उम्मीद थी कि इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव कर कुछ राहत दी जाएगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. टैक्स में राहत न मिलना मिडिल क्लास के लिए एक बड़ा झटका है. वहीं, सरकार द्वारा ‘यूथ-फर्स्ट’ के नारे तो दिए गए, लेकिन रोजगार पैदा करने के लिए न तो कोई बड़ी नई योजना दिखी और न ही कोई ठोस जॉब इंसेंटिव दिया गया.
शेयर बाजार में कोहराम और शहरों का विकास धीमा
बजट के बाद शेयर बाजार में आई गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. F&O ट्रेड पर सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी करने से रिटेल निवेशकों में भारी नाराजगी देखने को मिली है. इसके अलावा, शहरी विकास, मेट्रो और इंटर्नशिप जैसी अहम योजनाओं के बजट में कटौती की गई है. जानकारों का मानना है कि इससे शहरों में रोजगार के अवसर कम होंगे और इंफ्रास्ट्रक्चर के काम की रफ्तार धीमी पड़ सकती है.
कल की चिंता, आज की अनदेखी
कुल मिलाकर यह बजट “कल की अर्थव्यवस्था” को तो मजबूत करता नजर आता है, लेकिन “आज की नौकरी, आज की आय और आज की महंगाई” से जूझ रही जनता को कोई मरहम नहीं लगा पाया. सरकार ने विकास की नींव रखने का दावा तो किया है, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि इस विकास का फल आम आदमी तक आखिर कब पहुंचेगा.
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