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Dharmendra Pradhan Resignation: क्या इस्तीफे के बाद खाली करना होगा सरकारी बंगला? जानिए कौन-कौन सी सुविधाएं होंगी खत्म

Dharmendra Pradhan Resignation: केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद धर्मेंद्र प्रधान अब कैबिनेट मंत्री के अधिकारों और सुविधाओं के पात्र नहीं रहेंगे। उनके इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या उन्हें अपना सरकारी बंगला भी खाली करना होगा और किन-किन सुविधाओं में बदलाव आएगा।

क्या खाली करना होगा सरकारी बंगला?

कैबिनेट मंत्री के तौर पर धर्मेंद्र प्रधान को नई दिल्ली के लुटियंस क्षेत्र में टाइप-8 श्रेणी का सरकारी बंगला आवंटित था। पद छोड़ने के बाद नियमों के अनुसार उन्हें यह आवास खाली करना होगा।

हालांकि, धर्मेंद्र प्रधान ओडिशा के संबलपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं। ऐसे में उन्हें सरकारी आवास पूरी तरह छोड़ना नहीं पड़ेगा, बल्कि सांसद के रूप में निर्धारित पात्रता के अनुसार नया और अपेक्षाकृत छोटा सरकारी आवास आवंटित किया जाएगा।

बंगला खाली करने के लिए कितना समय मिलता है?

संसदीय नियमों और दिशानिर्देशों के तहत किसी केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे के बाद सरकारी आवास खाली करने के लिए एक निर्धारित समयसीमा दी जाती है। सामान्यतः इस्तीफा प्रभावी होने की तारीख से करीब 30 दिनों के भीतर मंत्री को अपना कैबिनेट श्रेणी का सरकारी आवास खाली करना होता है और नए आवंटित सांसद आवास में स्थानांतरित होना पड़ता है।

इस्तीफे के बाद कौन-कौन सी सुविधाएं समाप्त हो जाती हैं?

कैबिनेट मंत्री का पद छोड़ने के साथ ही धर्मेंद्र प्रधान को मिलने वाला ₹1 लाख प्रतिमाह का मूल वेतन और मंत्री पद से जुड़े विशेष आधिकारिक भत्ते तत्काल प्रभाव से समाप्त हो जाते हैं। इसके अलावा केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठकों में शामिल होने का अधिकार और नीतिगत फैसलों में भागीदारी भी खत्म हो जाती है।

हालांकि, सांसद होने के कारण उन्हें सांसद के रूप में मिलने वाला वेतन, भत्ते और अन्य निर्धारित सुविधाएं पहले की तरह मिलती रहेंगी।

VIP सुविधाएं और स्टाफ भी वापस लिया जाता है

मंत्री पद समाप्त होने के साथ ही मंत्रालय की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली कई विशेष सुविधाएं भी वापस ले ली जाती हैं। इनमें आधिकारिक सरकारी वाहन, ड्राइवर, ईंधन और अन्य मंत्री स्तरीय सुविधाएं शामिल हैं।

इसके अलावा निजी सचिव (Private Secretary), विशेष कर्तव्य अधिकारी (OSD), सलाहकार और मंत्रालय से जुड़े अन्य प्रशासनिक कर्मचारियों की टीम भी पद छोड़ने के बाद वापस ले ली जाती है, क्योंकि ये सुविधाएं केवल मंत्री पद के दौरान ही उपलब्ध रहती हैं।

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